प्रत्येक वर्ष समाज में महिलाओं के योगदान और उपलब्धियों पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए '8 मार्च' को सम्पूर्ण विश्व में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए लैंगिक समानता के लिए आवाज उठाना है I वर्तमान समय में महिलाए पुरुषो से कंधे से कन्धा मिला कर प्रत्येक क्षेत्र  में आगे बढ़ रही है, फिर भी महिलाओं के विरुद्ध कई प्रकार के भेदभाव एवम् हिंसा की घटनाएँ देखने को मिलती है ऐसे में सम्पूर्ण विश्व में लेंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता हैI महिला दिवस पर स्त्री की प्रेम, स्नेह व मातृत्व के साथ ही शक्तिसंपन्न स्त्री की मूर्ति सामने आती है। संयुक्त राष्ट्र हर वर्ष महिला दिवस पर एक विषय वस्तु (थीम) रखता है। इस वर्ष का थीम है- ‘प्रेस फॉर प्रोग्रेस” हैI 2017 की वर्ल्‍ड इकनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, महिला-पुरुष के बीच लैंगिक असमानता को खत्‍म करने में अभी 100 साल और लगेंगे, ऐसे में लेंगिक समानता को बदावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जैसे दिवस अत्यंत महत्वपर्ण हो जाता है

 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: उद्देश्य

महिलाएँ समाज का मुख्य हिस्सा होती हैं तथा आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक क्रियाओं में एक बड़ी भूमिका निभाती हैं, महिलाओं की सभी उपलब्धियों की सराहना करने और याद करने के लिये अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता हैं।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: संक्षिप्त इतिहास

इतिहास के अनुसार आम महिलाओं द्वारा समानाधिकार की यह लड़ाई शुरू की गई थी। लीसिसट्राटा नामक महिला ने प्राचीन ग्रीस में फ्रेंच क्रांति के दौरान युद्ध समाप्ति की मांग रखते हुए आंदोलन की शुरुआत की, फ़ारसी महिलाओं के समूह ने वरसेल्स में इस दिन एक मोर्चा निकाला, इसका उद्देश्य युद्ध के कारण महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार को रोकना था। पहली बार सन् 1909 में सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ अमेरिका द्वारा पूरे अमेरिका में 28 फ़रवरी को महिला दिवस मनाया गया था। 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल द्वारा कोपेनहेगन में महिला दिवस की स्थापना हुई। 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में लाखों महिलाओं ने रैली निकाली। इस रैली में मताधिकार, सरकारी नौकरी में भेदभाव खत्म करने जैसे मुद्दों की मांग उठी। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, रूसी महिलाओं द्वारा पहली बार शांति की स्थापना के लिए फ़रवरी माह के अंतिम रविवार को महिला दिवस मनाया गया। यूरोप भर में भी युद्ध विरोधी प्रदर्शन हुए। 1917 तक रूस के दो लाख से ज़्यादा सैनिक मारे गए, रूसी महिलाओं ने फिर रोटी और शांति के लिए इस दिन हड़ताल की। हालांकि राजनेता इसके ख़िलाफ़ थे, फिर भी महिलाओं ने आंदोलन जारी रखा और तब रूस के जार को अपनी गद्दी छोड़नी पड़ी और सरकार को महिलाओं को वोट के अधिकार की घोषणा करनी पड़ी। 'महिला दिवस' अब लगभग सभी विकसित, विकासशील देशों में मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं को उनकी क्षमता, सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक तरक़्क़ी दिलाने व उन महिलाओं को याद करने का दिन है जिन्होंने महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए अथक प्रयास किए। 'संयुक्त राष्ट्र संघ' ने भी महिलाओं के समानाधिकार को बढ़ावा और सुरक्षा देने के लिए विश्वभर में कुछ नीतियाँ, कार्यक्रम और मापदंड निर्धारित किए हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार किसी भी समाज में उपजी सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक समस्याओं का निराकरण महिलाओं की साझेदारी के बिना नहीं पाया जा सकता।

 

 अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: कार्यक्रम

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक खास कार्यक्रम है जिसे लोगों के साथ ही व्यापार, राजनीतिक, समुदायिक, शिक्षण संस्थानों, आविष्कारक, टीवी व्यक्तित्व आदि महिला नेतृत्व के द्वारा 8 मार्च को पूरे विश्व भर में मनाया जाता है। अन्य महिला अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतियोगी गतिविधि, भाषण, प्रस्तुतिकरण, चर्चा, बैनर, सम्मेलन, महिला परेड तथा सेमिनार जैसे विभिन्न प्रकार कार्यक्रम के आयोजन के द्वारा इसे मनाया जाता है I महिला शिक्षिका को उनके विद्यार्थियों द्वारा, अपने बच्चों के द्वारा माता-पिता को, बहनों को भाईयों के द्वारा, पुत्री को अपने पिता के द्वारा, उपहार दिया जाता है। ज्यादातर व्यावसायिक संस्थाएँ, सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालय, शिक्षण संस्थान, इस दिन बंद रहते हैं। आमतौर पर इस उत्सव को मनाने के दौरान लोग बैंगनी रंग का रिबन पहने रहते हैं।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: विषय वस्तु (थीम)

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस प्रत्येक वर्ष एक विशेष थीम पर आधारित होता है। पिछले कुछ वर्षो की विषय वस्तु (थीम) निम्नलिखित थी:

  1. 1975 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को संयुक्त राष्ट्र ने मान्यता दी”
  2. 1996 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “भूतकाल का जश्न, भविष्य की योजना”।
  3. 1997 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “महिला और शांति की मेज”।
  4. 1998 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “महिला और मानव अधिकार”।
  5. 1999 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “महिलाओं के खिलाफ हिंसा मुक्त विश्व”।
  6. 2000 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “शांति के लिये महिला संसक्ति”।
  7. 2001 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “महिला और शांति: विरोध का प्रबंधन करती महिला”।
  8. 2002 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “आज की अफगानी महिला: वास्तविकता और मौके”।
  9. 2003 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “लैंगिक समानता और शताब्दी विकास लक्ष्य”।
  10. 2004 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “महिला और एचआईवी/एड्स”।
  11. 2005 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “2005 के बाद लैंगिक समानता; एक ज्यादा सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर रहा है”।
  12. 2006 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “निर्णय निर्माण में महिला”।
  13. 2007 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के लिये दंडाभाव का अंत ”
  14. 2008 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “महिलाओं और लड़कियों में निवेश”।
  15. 2009 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिये महिला और पुरुष का एकजुट होना”।
  16. 2010 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “बराबर का अधिकार, बराबर के मौके: सभी के लिये प्रगति”।
  17. 2011 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “शिक्षा, प्रशिक्षण और विज्ञान और तकनीक तक बराबरी की पहुँच: महिलाओं के लिये अच्छे काम के लिये रास्ता”।
  18. 2012 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण, गरीबी और भूखमरी का अंत”।
  19. 2013 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “वादा, वादा होता है: महिलाओं के खिलाफ हिंसा खत्म करने का अंत आ गया है”।
  20. 2014 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था “वादा, वादा होता है: महिलाओं के समानता सभी के लिये प्रगति है”।
  21. 2015 का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्सव का थीम था सशक्त महिला-सशक्त मानवता। महिलाओं को सशक्त करने का अर्थ है 'इंसानियत को बुलंद करना'।

 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: भारत में

भारत में भी महिला दिवस व्यापक रूप से मनाया जाता है। पूरे देश में इस दिन महिलाओं को समाज में उनके विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है और समारोह आयोजित किए जाते हैं। महिलाओं के लिए काम कर रहे कई संस्थानों द्वारा जैसे अवेक, सेवा, अस्मिता, स्त्रीजन्म, जगह-जगह महिलाओं के लिए प्रशिक्षण शिविर लगाए जाते हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। समाज, राजनीति, संगीत, फिल्म, साहित्य, शिक्षा क्षेत्रों में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए महिलाओं को सम्मानित किया जाता है। कई संस्थाओं द्वारा गरीब महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

भारत में महिलाओं को शिक्षा, वोट देने का अधिकार और मौलिक अधिकार प्राप्त है। धीरे-धीरे परिस्थितियां बदल रही हैं। भारत में आज महिला आर्मी, एयर फोर्स, पुलिस, आईटी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा जैसे क्षेत्र में पुरूषों के कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैं। माता-पिता अब बेटे-बेटियों में कोई फर्क नहीं समझते हैं। लेकिन यह सोच समाज के कुछ ही वर्ग तक सीमित है।

सही मायने में महिला दिवस तब ही सार्थक होगा जब विश्व भर में महिलाओं को मानसिक व शारीरिक रूप से संपूर्ण आजादी मिलेगी, जहां उन्हें कोई प्रताड़ित नहीं करेगा, जहां उन्हें दहेज के लालच में जिंदा नहीं जलाया जाएगा, जहां कन्या भ्रूण हत्या नहीं की जाएगी, जहां बलात्कार नहीं किया जाएगा, जहां उसे बेचा नहीं जाएगा। समाज के हर महत्वपूर्ण फैसलों में उनके नजरिए को महत्वपूर्ण समझा जाएगा। तात्पर्य यह है कि उन्हें भी पुरूष के समान एक इंसान समझा जाएगा। जहां वह सिर उठा कर अपने महिला होने पर गर्व करे, न कि पश्चाताप, कि काश मैं एक लड़का होती।

 

[printfriendly]