अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण  परमाणु ऊर्जा के सैन्य उपयोग को किसी भी प्रकार से रोकने के लिए प्रयासरत एक स्वायत्त अंतर्राष्ट्रीय संस्था है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण की स्थापना 29 जुलाई, सन 1957 ई. में की गई थी।

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्रसंघ के मुख्यालय में 26 अक्टूबर, 1957 को आयोजित एक अंतरर्राष्ट्रीय सम्मेलन में इसकी संविधि स्वीकृत की गई थी। संयुक्त राष्ट्रसंघ से इसका संबंध एक समझौते के माध्यम से जोड़ा गया है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण का मुख्यालय वियना(ऑस्ट्रिया) में है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण के अध्यक्ष युकीया अमानो है

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण: उद्देश्य 
 
 
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण का मुख्य उद्देश्य विश्व में परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है।
 
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण: संक्षिप्त इतिहास 
 
 
द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका द्वारा परमाणु शस्त्रों का उपयोग किए जाने के परिणामस्वरूप सम्पूर्ण विश्व में आरंभ हुई परमाणु शस्त्रों की होड़ ने सम्पूर्ण विश्व में भय की स्थिति उत्पन्न क्र दी जिसके फलस्वरूप 1957 में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण  की स्थापना की गई। 
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण  की उत्पत्ति 8 दिसंबर 1 9 53 को  संयुक्त राष्ट्र  महासभा में  यू.एस. राष्ट्रपति ईसेनहोवर के "शांति के लिए परमाणु" संबोधन से हुई। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण  परमाणु ऊर्जा के उपयोग से जुड़ा हुआ है। 
 
 
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण: संरचना 
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण  संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद को अपनी रिपोर्ट देती है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण की कुल सदस्य संख्या 168 ( 2016 तक) है। इस संस्था के मुख्यत: तीन अंग हैं-
 
  • राज्यपालों का बोर्ड अर्थात गवर्नर मंडल (बोर्ड ऑफ गर्वनर्स),
  • सामान्य सम्मेलन (जनरल कांफ्रेंस) और
  • सचिवालय (सेकेट्रेरिएट)

1.  गवर्नर मंडल (बोर्ड ऑफ गर्वनर्स):   बोर्ड ऑफ गर्वनर्स में सदस्यों की संख्या 35  होती है, जिनमें से 13  सदस्य पिछले बोर्ड से लिए जाते हैं, जबकि शेष 22  सदस्यों का चुनाव सामान्य सम्मेलन द्वारा होता है। बोर्ड ऑफ गर्वनर्स का मुख्य कार्य अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण की नीतियों का निर्धारण करना है।
2.  सामान्य सम्मेलन (जनरल कांफ्रेंस): सामान्य सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरणका एक महत्वपूर्ण अंग है।  जनरल कांफ्रेंस की प्रत्येक वर्ष सितंबर माह में बैठक होती है, जिसमें बोर्ड ऑफ गर्वनर्स द्वारा प्रस्तावित बजट और कार्यो की सहमति प्रदान की जाती है।इसके अतिरिक्त सामान्य सम्मेलन  में महासचिव का भी चयन किया जाता है।

 

 

3.  सचिवालय (सेकेट्रेरिएट): सचिवालय के अध्यक्ष महासचिव होते हैं। यह जनरल कांफ्रेंस और बोर्ड ऑफ गर्वनर्स द्वारा लाए गए प्रस्तावों को कार्यरूप में लाने के लिए उत्तरदायी होता है।

इस संस्था के तीन मुख्य कार्य  हैं-

  • सुरक्षा,
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं
  • सुरक्षा व संपुष्टि।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण: कार्य 
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण के कार्य निम्नलिखित है :
  • सार्वभौमिक स्तर पर शांति, स्वास्थ्य तथा समृद्धि को त्वरायित एवं परिवर्धित करने की दिशा में परमाणु ऊर्जा का उपयोग।
  • इस तथ्य के प्रति सजग रहना कि अभिकरण द्वारा परमाणु ऊर्जा की  संस्तुति पर तथा इसकी देखभाल अथवा नियंत्रण में दी जाने वाली सहायता का उपयोग कहीं सैनिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए तो नहीं किया जा रहा है।

  • अभिकरण सदस्य राष्ट्रों को (जनवरी, 1970 ई. तक इनकी संख्या 103 थी) पारमाणविक शक्ति के विकास, जिसमें जल के अपक्षारीकरण में पारमाण्विक शक्ति का उपयोग भी सम्मिलित है, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा तथा रेडियोधर्मिता को नष्ट करने की व्यवस्था इत्यादि के संबंध में परामर्श और तकनीकी सहायता भी देता है।
  • कायचिकित्सा, कृषि उद्योग तथा जल विज्ञान प्रभृति क्षेत्रों में विकिरण रेडिएशन एवं रेडियो विकिरण समस्थानिकोंके उपयोग को उक्त अभिकरण विशेषज्ञों की सेवा जुटाकर, प्रशिक्षण पाठ्‌यक्रम की व्यवस्था करके, शिक्षावृत्ति देकर, अनुसंधान संबंधी अनुबंध करके, विज्ञान गोष्ठियाँ आयोजित करके तथा तत्संबंधी साहित्य का प्रकाशन करके प्रोत्साहित करता है।

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