प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को सम्पूर्ण भारत में 'राष्ट्रीय एकता दिवस' सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के रूप में मनाया जाता है।  सर्वप्रथम 2014 में भारत में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। सरदार पटेल  स्वतंत्रता संग्राम सैनानी एवं स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री  थे।

कई रियासतों में विभाजित स्वतंत्र भारत को एक राष्ट्र क्र रूप में खड़े करने में सरदार पटेल का अत्यंत अहम् योगदान रहा। सरदार पटेल के विशेष योगदान की वजह से  रियासतों को एक देश में सम्मिलित किया गया और भारत एक राष्ट्र बना।


राष्ट्रीय एकता दिवस: उद्देश्य
राष्ट्रीय एकीकरण विभिन्न जातियों, संस्कृतियों, धर्मों और क्षेत्रों से रहने के बाद भी एक मजबूत और विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिये देश के लोगों के बीच आम पहचान की भावना को दर्शाता है। यह विविधता में एकता और महान स्तर करने के लिए लोगों के बीच एकता की भावना को बढ़ावा देता है। यह अलग समुदाय के लोगों के बीच एक प्रकार की जातीय और सांस्कृतिक समानता लाता है। यह कहा जा सकता है कि वह एकता है जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ आम भारतीय लोगों के बीच व्यक्त की गई  थी।
सम्पूर्ण विश्व में भारत को सबसे बड़ा विविधतापूर्ण लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में देखा जाता है। भारत विश्व में दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, जहाँ 1652 के आसपास भाषाऍ और बोलियॉ बोली जाती है। यह देश दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों को जैसे हिंदू, बौद्ध, ईसाई, जैन, इस्लाम, सिख और पारसी धर्मों को विभिन्न संस्कृति, खानपान की आदतों, परंपराओं, पोशाकों और सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ शामिल करता है। यह जलवायु में काफी अन्तर के साथ एक विविधतापूर्ण देश है। देश में प्रमुख भिन्नता होने के बाद भी, इसका प्रत्येक भाग एक ही संविधान द्वारा बहुत शांति के साथ नियंत्रित है। ऐसे में वार्षिक आधार पर राष्ट्रीय एकता का जश्न अन्य धर्मों के लिए लोगों के बीच सहिष्णुता और बंधुत्व की भावना  विकसित करने के लिए सभी के लिए एक अवसर के लिए लाता है। विभिन्न राष्ट्रीय स्तर कार्यक्रम समारोह और राष्ट्रीय प्रतीक जैसे राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय चिह्न और राष्ट्रीय गान भी एकता को बढ़ावा देने वाली शक्ति के रूप में काम कर रहे हैं।


सरदार वल्लभ भाई पटेल
 रष्ट्रीय एकता दिवस सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्म दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु मनाया जाता है । सरदार पटेल एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री थे। स्वतंत्रता की लड़ाई एवं भारत राष्ट्र के निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान था, जिसके कारण उन्हें भारत का लौह पुरुष भी कहा जाता है।

स्वतंत्रता पश्चात एकीकरण में सरदार पटेल की भूमिका
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद क़रीब पाँच सौ से भी ज़्यादा देसी रियासतों का एकीकरण सबसे बड़ी समस्या थी। 5 जुलाई 1947 को सरदार पटेल ने रियासतों के प्रति नीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि 'रियासतों को तीन विषयों - सुरक्षा, विदेश तथा संचार व्यवस्था के आधार पर भारतीय संघ में शामिल किया जाएगा।' धीरे धीरे बहुत सी देसी रियासतों के शासक भोपाल के नवाब से अलग हो गये और इस तरह नवस्थापित रियासती विभाग की योजना को सफलता मिली। भारत के तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भारतीय संघ में उन रियासतों का विलय किया था जो स्वयं में संप्रभुता प्राप्त थीं। उनका अलग झंडा और अलग शासक था। सरदार पटेल ने आज़ादी के ठीक पूर्व (संक्रमण काल में) ही पी.वी. मेनन के साथ मिलकर कई देसी राज्यों को भारत में मिलाने के लिये कार्य आरम्भ कर दिया था। पटेल और मेनन ने देसी राजाओं को बहुत समझाया कि उन्हें स्वायत्तता देना सम्भव नहीं होगा। इसके परिणामस्वरूप तीन को छोडकर शेष सभी राजवाडों ने स्वेच्छा से भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। 15 अगस्त 1947 तक हैदराबाद, कश्मीर और जूनागढ़ को छोड़कर शेष भारतीय रियासतें 'भारत संघ' में सम्मिलित हो गयीं। जूनागढ़ के नवाब के विरुद्ध जब बहुत विरोध हुआ तो वह भागकर पाकिस्तान चला गया और जूनागढ़ भी भारत में मिल गया। जब हैदराबाद के निजाम ने भारत में विलय का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया तो सरदार पटेल ने वहाँ सेना भेजकर निजाम का आत्मसमर्पण करा लिया।

राष्ट्रीय एकता दिवस: कार्यक्रम 
राष्ट्रीय एकता दिवस हमारी राष्ट्रीय एकता के प्रतिक का अवसर  है इस दिन सभी नागरिको को राष्ट्रीय एकता का महत्व बताने  के लिए विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते है।इस  दिन सरदार वल्लभभाई पटेल के मूर्ति पर माल्यार्पण करके उनके जन्मदिवस को मनाया जाता है तथा सभी भारतीय को यह शपथ भी दिलाया जाता है की वे भारत की अखंडता को हमेशा बनाए रखेंगे। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर  दिल्ली से लेकर देश विभिन्न शहरो में मैराथन दौड़ यानि Run For Unity (एकता की दौड़) का आयोजन किया जाता है जिसमे विभिन्न धर्म, जाति, सम्प्रदाय सभी तरह के लोग भाग लेते है जिसके माध्यम से देश के नागरिको को एकता का संदेश देने का प्रयास किया जाता है।

राष्ट्रीय एकता दिवस: महत्व
कोई भी राष्ट्र  तभी तक सुरक्षित रहता है जबतक की उस देश की जनता और शासन में आपसी एकता और अखंडता निहित होती है हमारे देश की इसी आपसी एकता की कमी का फायदा उठाते हुए अंग्रेजो ने भारत में फूट डालो और राज करो की नीति अपना  हमारे देश में 200 से अधिक वर्षो तक राज किया, हमारी इस गुलामी के कई कारण थे जैसे भारत के सभी राज्यों, रियासतों में आपसी कोई तालमेल नही था सभी रियासतों के राजा सिर्फअपना हित  देखते थे अगर कोई बाहरी शत्रु आक्रमण करे तो कोई भी एक दुसरे का साथ नही देने आता था यही अनेक कारण थे जिसके कारण हमारा देश इसी एकता के अभाव में विकास के राह से भटक गया और बाहरी साम्राज्यों ने इसका लाभ उठाया। यद्यपि अब भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है इसका अर्थ कदापि यह नहीं है की हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा एवं संप्रभुता पर किसी भी प्रकार का खतरा नहीं है। वर्तमान समय मे भी  हमारे समाज में कई ऐसे असमाजिक तत्व विद्यमान है जिसे राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को ख़तरा बना रहता है। ऐसे में राष्ट्र की एकता कायम रखे रहने के लिए राष्ट्रीय एकता दिवस एक महत्वपूर्ण माध्यम बना जाता है जिससे हम भारतवासियो को एकता के सूत्र में बांधे रख सके।

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