हर वर्ष  20 अक्टूबर को  सम्पूर्ण विश्व में विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस मनाया जाता है। यह दिवस ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम, निदान एवं उपचार के लिए वैश्विक जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से मनाया जाता  है। वर्ष 2016 में  इस दिवस का विषय "अपनी हड्डियों को प्यार करें तथा अपने भविष्य को सुरक्षित करें" था । 

यह दिवस लोगों को अपने मांसपेशी स्वास्थ्य एवं अपनी हड्डियों को सुरक्षित करने के लिए जल्दी कार्रवाई तथा स्वास्थ्य अधिकारियों एवं चिकित्सकों को उनके समुदायों की हड्डियों के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने में प्रेरित करने के लिए मनाया जाता है।स्विज़रलैंड  स्थित इंटरनेशनल ऑस्टियोपोरोसिस  फाउंडेशन द्वारा इस दिवस का आयोजन किया जाता है।

उद्देश्य
विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में लोगों को अपने मांसपेशी स्वास्थ्य एवं अपनी हड्डियों को सुरक्षित करने के प्रति जागरूक करना और जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार को स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण के लिए प्रेरित करना है।

ऑस्टियोपोरोसिस?
ऑस्टियोपोरोसिस की विशेषता हड्डियों के ऊतकों की ख़राबी है। इस रोग में हड्डियां नाज़ुक एवं कमजोर हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप रीढ़ की हड्डी विशेषकर कूल्हे एवं कलाई के फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं को मुख्यतः पचास वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों की तुलना में ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित होने का ख़तरा अधिक होता है।


ऑस्टियोपोरोसिस के कारण
ऑस्टियोपोरोसिस का सबसे मुख्य कारण है आयु। बढ़ती आयु के साथ हड्डियों के क्षरण की संभावना बढ़ जाती है विशेषकर कैल्सियम की कम मात्रा होने की स्थिति में। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डियां टूटने का खतरा अधिक होता है। ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं, जिससे इसके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। पीठ में दर्द, कद का छोटा पड़ना या आगे की तरफ झुक जाना इसके कुछ महत्वपूर्ण लक्षण हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में दो करोड़ 60 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं, जिसमें 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। प्राइमस सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ पंकज वालेछा के अनुसार, रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं में एस्ट्रोजेन हार्मोन कम बनने लगता है, जिससे हड्डियों के कमज़ोर होने का खतरा बढ़ जाता है। बच्चे को जन्म देने के दौरान भी महिलाओं में कैल्शियम की कमी हो जाती है, जिसकी भरपाई कर पाना अक्सर मुश्किल होता है। इसलिए 45 से 50 साल की जिन महिलाओं में मासिक धर्म अनियमित हो गया हो, उन्हें कैल्शियम लेना शुरू कर देना चाहिए।

ऑस्टियोपोरोसिस की उत्पत्ति रोगो या अन्य कारणों द्वारा हो सकती है, जो इस प्रकार  हैं:
1 हार्मोन सम्बन्धी समस्या
2 पोषणरहित आहार
3 अत्यधिक धूम्रपान या मदिरापान
4 अनुवांशिकता।


ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण
ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण इस प्रकार है :
1 पीठ में दर्द।
2 समय के साथ लम्बाई में कमी।
3 शरीर का झुकना/झुकाव।
4 कूल्हे या रीढ़ की हड्डी का फ्रैक्चर।

ऑस्टियोपोरोसिस के रोकथाम के उपाय
1 कैल्शियम और विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों जैसे कि दूध, दही एवं हरी पत्तेदार सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करें तथा प्राकृतिक धूप के संपर्क में रहें।
2 हड्डियों की क्षति को रोकने के लिए नियमित व्यायाम करें।
3 धूम्रपान एवं हद से ज़्यादा शराब का सेवन करने से बचें।
4 अपने आप को तनाव से राहत दिलाने वाली गतिविधियों जैसे कि योग एवं ध्यान में व्यस्त रखें।
5 अपने शरीर के वज़न, कैल्शियम एवं विटामिन डी के स्तर की नियमित जाँच रखें।
6 हद से ज़्यादा शराब का सेवन करने से बचें। ऐसा करना ऑस्टियोपोरोसिस के ज़ोखिम को कम करता है।

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