विश्व बैंक एक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान है जो पूंजी कार्यक्रमों के लिए दुनिया के देशों को ऋण प्रदान करता है। वास्तव में विश्व बैंक संयुक्त राष्ट्र संघ की विशिष्ट संस्था है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक नाम से भी जाना जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों को पुनर्निमाण और विकास के कार्यों में आर्थिक सहायता देना एवं विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं को एक व्यापक विश्व अर्थव्यवस्था में शामिल करना और विकासशील देशों में ग़रीबी उन्मूलन के प्रयास करना है।

विश्व बैंक नीति सुधार कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए ऋण देता है।  विश्व बैंक विश्व बैंक समूह का एक घटक है। विश्‍व बैंक का मुख्‍यालय अमेरिका के शहर वाशिंगटन डीसी में हैं।  जिम योंग किम विश्व बैंक के वर्तमान में अध्यक्ष है।

विश्व बैंक के उद्देश्य
आईबीआरडी का मूल उद्देश्य गरीबी घटाने तथा उत्पादक क्षमता को बढ़ाने वाली परियोजनाओं को अपनाने के लिए तत्पर विकासशील सदस्य देशों की उचित शताँ पर कर्ज उपलब्ध कराना है। बैंक द्वारा गारंटी या भागीदारी के माध्यम से निजी निवेश ऋणों को प्रोत्साहित किया जाता है तथा विशिष्ट निवेश परियोजनाओं एवं समग्र विकास योजनाओं के क्षेत्र में तकनीकी सहायता उपलब्ध करायी जाती है। आईबीआरडी की गतिविधियां मुख्यतः उधार व ऋण, सहायता सहयोग, तकनीकी सहायता तथा अन्य सम्बद्ध सेवाओं पर केन्द्रित होती हैं। बैंक के संसाधनों में सदस्यों से प्राप्त पूंजी संचय, प्रतिधारित आय तथा पूंजी बाज़ार से प्राप्त उधार शामिल हैं। बकाया कजों के अंशों की बिक्री (मुख्यतः बैंक गारंटी के बिना) तथा पुनर्भुगतानों के प्रवाह द्वारा बैंक का कोष समृद्ध होता रहता है। कर्ज दिया जाने वाला अधिकांश कोष विश्व पूंजी बाज़ारों में से प्रत्यक्ष उधार के रूप में इकट्ठा किया जाता है। बैंक के कार्यचालन हेतु आवश्यक कोष की प्राप्ति सार्वजनिक व निजी निवेशकों के लिए ब्याजधारी बॉण्ड या प्रपत्र जारी करके की जाती है।


बैंक युक्तिसंगत शर्तों पर कर्ज प्रदान करता है और साथ ही कमीशन शुल्क एवं ब्याज के रूप में लाभार्जन भी सुनिश्चित कर लेता है। ऋण सामान्यतः दीर्घावधिक होते हैं, जो 5 वर्ष की रियायती अवधि के साथ 20 वर्षों के भतीर मुद्राओं के रूप में चुकाये जाने होते हैं। कर्जदारी या उधारी सदस्य देशों तक सीमित होती है। बकाया ऋणों की मात्रा अंशदान पूंजी भंडार की विशुद्ध मात्रा से अधिक नहीं हो सकती। प्रत्येक ऋण पर सम्बद्ध देश की सरकार गारंटी प्रदान करती है। यह प्रावधान निजी उद्यम हेतु ऋण प्राप्त करने का निषेध करता है। ऋण पोषित परियोजनाओं का लाभकारी एवं उपयोगी होना आवश्यक है। सिद्धांत रूप में, ऋण उन परियोजनाओं को उपलब्ध कराया जाता है, जिन्हें अन्य स्रातों से उचित शर्तों पर वित्त प्राप्त नहीं हो सकता। बैंक द्वारा प्रत्येक ऋण पोषित परियोजना की सघन निगरानी एवं लेखा परीक्षण किया जाता है।

विश्व बैंक के मूल  उद्देश्य इस प्रकार है:
1. आर्थिक पुनर्निर्माण और विकास के लिए सदस्य देशो को दीर्घकालीन पूंजी  प्रदान करना। 
2 भुगतान संतुलन और अंतर्राष्ट्रीय  व्यपार के संतुलित विकास को सुनिश्चित करने के लिए  दीर्घकालिक   पूंजी निवेश को प्रेरित करना।
अंतर्राष्ट्रीय निवेश को बढ़ावा देना।   

 

विश्व बैंक का संक्षिप्त इतिहास
संयुक्त राष्ट्र संघ के वर्ष 1944 में हुए ब्रेटनवुड्स सम्मेलन के तहत वर्ष 1945 में ‘अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष’ (आईएमएफ) और ‘अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक’ (आईबीआरडी) की स्थापना की गई, इसीलिए इन्हें ब्रेटनवुड्स जुड़वां भी कहते हैं इस संस्‍था की स्‍थापना करने का मुख्‍य उद्देश्‍य विश्‍व युद्ध में बर्बाद  हो चुकी अर्थव्‍यवस्‍था का पुनर्निमाण करना था।
आईबीआरडी चार अन्य संस्थाओं इंटरनेशनल फाइनेंसियल कॉर्पोरेशन (1956), इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (1960), इंटरनेशनल सेंटर फॉर सेटलमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट डिस्प्यूट (1966) और मल्टीलैटेरल इन्वेस्टमेंट गारंटी एजेंसी (1988) के साथ मिलकर विश्व बैंक समूह का निर्माण करती है।

विश्‍व बैंक का संगठनात्मक ढांचा


विश्व  बैंक के संगठनात्मक ढांचे के अंतर्गत बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स, कार्यकारी निदेशक तथा अध्यक्ष शामिल हैं। सभी सदस्य देशों का एक गवर्नर एवं वैकल्पिक प्रतिनिधि गवर्नर्स ऑफ बोर्ड में शामिल होता है। गवर्नर प्रायः सम्बद्ध देशों के वित्त मंत्री या वित्त सचिव स्तर के प्रशासक होते हैं, जो साथ-ही-साथ आईएमएफ, आईएफसी एवं मीगा के गवर्नरों के रूप में भी कार्य करते हैं। गवर्नर्स बोर्ड की बैठक वार्षिक रूप से होती है जिसमें इन सभी संस्थाओं के कामकाज की समीक्षा की जाती है। इस बोर्ड में प्रत्येक सदस्य को 250 मत तथा एक अतिरिक्त वोट (प्रत्येक अंश धारक के हिसाब से) प्राप्त होता है। इस प्रकार बैंक भारित मतदान प्रणाली पर आधारित होकर कार्य करता है, जो देशों के निजी अंशदान की मात्रा (जो अपने आप में आईएमएफ कोटे द्वारा निर्धारित है) पर टिकी हुई है। गरीब देशों की मतशक्ति आनुपातिक रूप से काफ़ी कम है। बोर्ड की तीन में से एक बैठक वाशिंगटन से दूर स्थल पर की जाती है।

गवर्नर्स बोर्ड की अधिकांश शक्तियां 24 कार्यकारी निदेशकों को हस्तांतरित कर दी गयी हैं, जो बैंक मुख्यालय पर महीने में कम-से-कम एक बार अपनी बैठक करते हैं। ये निदेशक बैंक के सामान्य कामकाज के संचालन हेतु उत्तरदायी होते हैं। नये सदस्यों के प्रवेश, पूंजी स्टॉक में परिवर्तन तथा बैंक की शुद्ध आय के वितरण से सम्बंधित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की शक्तियों को हस्तांतरित नहीं किया गया है। पूंजी स्टॉक में अधिकतम अंश रखने वाले पांच देशों (फ़्राँस, जर्मनी, जापान, अमेरिका व ब्रिटेन) द्वारा पृथक् रूप से पांच कार्यकारी निदेशकों की नियुक्ति की जाती है। शेष, 19 निदेशकों का निर्वाचन दो वर्षीय कार्यकाल हेतु शेष सदस्य राष्ट्रों द्वारा किया जाता है, जो 19 भौगोलिक समूहों में विभाजित हैं। सऊदी अरब, चीन एवं रूस को पृथक् भौगोलिक समूहों का दर्जा प्राप्त है। प्रत्येक निदेशक स्वयं को निर्वाचित करने वाले भौगोलिक समूह में शामिल देशों को प्राप्त कुल मतों की इकाई के रूप में अपने मत का प्रयोग कर सकता है।

कार्यकारी निदेशक
विश्व बैंक का अध्यक्ष कार्यकारी निदेशकों का प्रधान होता है, जिसे 5 वर्षीय कार्यकाल हेतु चुना जाता है। अध्यक्ष आईबीआरडी के साथ-साथ आईडीए व आईएफसी के कामकाज का संचालन भी करता है। एक संधि समझौते के अनुसार बैंक का अध्यक्ष संयुक्त राज्य अमेरिका का नागरिक ही बन सकता है।

ऋण सुविधा
पुनर्निर्माण एवं विकास हेतु ऋण सुविधा प्रदान करने के अतिरिक्त विश्व बैंक द्वारा सदस्य राष्ट्रों को विभिन्न प्रकार की तकनीकी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए बैंक ने वाशिंगटन में 'द इकोनॉमिक डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट' तथा एक स्टाफ कॉलेज की भी स्थापना की है। बैंक ने अब तक वितरित अपने कुल ऋण का 75 प्रतिशत भाग अफ्रीका, एशिया और लेटिन अमेरिका के विकासशील राष्ट्रों को प्रदान किया है, जबकि यूरोप के विकसित राष्ट्रों को कुल ऋण का 25 प्रतिशत ही दिया गया है। बैंक ने ऋणदाता राष्ट्रों में समन्वय स्थापित करने का भी प्रयास किया है, ताकि सदस्य विशेष की वित्तीय आवश्यकताओं की और अधिक कारगर तरीके से पूर्ति की जा सके। विकासशील राष्ट्रों में विकास परियोजनाएं बनाने में सहायता देने के उद्देश्य से बैंक ने अनेक विकासशील राष्ट्रों में अपने मिशन स्थापित किए हैं। बैंक 'खाद्य एवं कृषि संगठन' (एफएओ), 'विश्व स्वास्थ्य संगठन' (डब्ल्यूएचओ), संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय विकास संगठन (यूनिडो), यूनेस्को आदि के विशेषज्ञों की मदद से कृषि, शिक्षा एवं जलापूर्ति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में परियोजनाओं की पहचान करने तथा उनकी तैयारी करने में सदस्य राष्ट्रों की सहायता करता है।


सदस्य देश
जनवरी 2014 की स्थिति के अनुसार इसकी सदस्य संख्या 188 थी। 'अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष' की भांति इसके भी दो प्रकार के सदस्य हैं- मौलिक सदस्य एवं सामान्य सदस्य। इसके भी 30 मौलिक सदस्य हैं, जिन्होंने 31 दिसंबर, 1945 तक विश्व बैंक की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की भांति विश्व बैंक के भी संस्थापक देशों में से एक है। 31 दिसंबर, 1945 के पश्चात् सदस्यता ग्रहण करने वाले राष्ट्रों को सामान्य सदस्य कहा जाता है। बैंक की पूंजी में सदस्य राष्ट्रों के अंश के अनुरूप ही बैंक के सदस्यों के मताधिकार का निर्धारण किया जाता है। प्रत्येक एक अंश पर एक अतिरिक्त मताधिकार सदस्य राष्ट्र की आवंटित किया जाता है।

विश्व बैंक के कार्य
विश्व बैंक सदस्य देशो विशेषकर विकाशील देशो में, विकास कार्यो के लिए ऋण मुहैया कराने में मुख्य भूमिका निभ रहा है। बैंक विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए 5  से 20  वर्ष की अवधि के लिए ऋण मुहैया करता है।
1 बैंक सदस्य देशो को उसके शेयर के 20% प्रदत्त  पूंजी के रूप में ऋण दे सकता है।
2 ऋण सेवा , ब्याज दर , शर्ते और नियमों के बारे में फैसला स्वयं करता है।
3 सामान्यता बैंक एक खास परियोजनाओं के लिए ऋण प्रदान करता है जिसकी विधिवत प्रस्तुति सदस्य देशो द्वारा बैंक में की जाती है।
4 ऋण लेने वाले देशो को ऋण का पुनर्भुगतान  या तो आरक्षित मुद्रा या जिस मुद्रा में ऋण मंजूर किया गया था, में  करना  होता है।
5 विश्व बैंक केवल विकासशील देशों को ऋण देता है
6 शुरूआत में विश्व बैंक बांध निर्माण और राजमार्गों के निर्माण जैसी विशिष्ट परियोजनाओं के लिए ऋण देता था।

विश्व बैंक और भारत
भारत के आर्थिक विकास की गति की त्वरित करने में विश्व बैंक ने देश की विभिन्न विकास परियोजनाओं में दीर्घकालीन पूंजी निवेश करके अभूतपूर्व योगदान दिया है। विभिन्न विकास परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए विश्व बैंक द्वारा दीर्घकालीन ऋण प्रदान किए गए हैं। विशेषतः देश की परिवहन एवं संचार, सिंचाई, शिक्षा, जलापूर्ति, विद्युत शक्ति, जनसंख्या नियंत्रण, गरीबी उन्मूलन, बुनियादी ढांचा, ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण आदि दीर्घकालीन परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए बैंक द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी गई है। विद्युत एवं सिंचाई के क्षेत्रों की आधारिक संरचना परियोजनाओं तथा सार्वजानिक क्षेत्र के बैंकों के पूंजीकरण के लिए विश्व बैंक ने भारत सरकार के लिए 4.3 अरब डॉलर (लगभग 2200 करोड़) के चार ऋण 24 सितम्बर, 2009 को स्वीकृत किए थे। जुलाई 2009 से जून 2010 के दौरान विश्व बैंक ने भारत के लिए 9.3 अरब डॉलर के ऋण स्वीकृत किए हैं। इसमें से 6.7 अरब डॉलर का ऋण आईबीआरडी द्वारा व शेष 2. 6 अरब डॉलर का ऋण विश्व बैंक की रियायती ऋण देने वाली खिड़की आईडीए द्वारा मंजूर की गई है। 2009-10 के दौरान आईबीआरडी से ऋण प्राप्त करने वाले देशों में भारत के बाद क्रमशः मेक्सिको, दक्षिण अफ़्रीका, ब्राज़ील तथा तुर्की का स्थान है। जबकि आईडीए से रियायती ऋण प्राप्त करने वालों में भारत के बाद अगले स्थान पर क्रमशः वियतनाम, तंजानिया, इथियोपिया व नाईजीरिया हैं।

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