20वी शताब्दी कई कारणो के आधार पर मानव इतिहास में अत्यंत अहम् मानी जाती है, क्योकि इस शताब्दी ने मानव जीवन को कई तरह से प्रभावित  किया। सम्पूर्ण विश्व, दो विश्व युद्धो की आग में जला और नाभिकीय शस्त्रों के इस्तेमाल ने सम्पूर्ण मानव जाति के समक्ष यह प्रश्न खड़ा कर दिया की यदि ऐसा ही होता रहा अर्थात यदि विश्व के यह देश इस प्रकार युद्ध में संलग्न रहे तो वह दिन दूर नहीं जब सम्पूर्ण मानव जाति समूल नष्ट हो जाए।

इस प्रकार, भय, मानव कल्याण और विश्वशांति की आवश्यकता के  फलस्वरूप विश्व में कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की स्थापना हुई। यह अंतर्राष्ट्रीय संगठन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान रखते है।
20वी शताब्दी में कई सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की स्थापना की गई है। कुछ संगठन जैसे विश्व कोष और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष मौद्रिक मुद्दों से निपटने के लिए ,सयुंक्त राष्ट्र संघ राजनितिक मुद्दों से निपटने के लिए। 

अंतर्राष्ट्रीय संगठन: अभिप्राय
अंतर्राष्ट्रीय संगठन उन संस्थाओं को कहते हैं जिसके सदस्य, कार्यक्षेत्र तथा उपस्थिति वैश्विक स्तर पर हो। अंतर्राष्ट्रीय संगठन कुछ विशेष उद्देश्यों के लिए स्थापित किये जाते हैं जो उनके संघटक दस्तावेजों में वर्णित किये जाते हैं।अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की स्थापना अंतर्राष्ट्रीय विधि के अनुसार की जाती है। इसका तात्पर्य है कि सामान्यतया इनके क्रियाकलाप अंतर्राष्ट्रीय विधि के सामान्यतः मान्य सिद्धांतों तथा नियमों के अंतर्गत सीमित होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगठन की स्थापना राज्यों द्वारा संधि के माध्यम से की जाती है, जो अंतर्राष्ट्रीय संगठन का संघटक लिखत होता है। कभी-कभी संगठनों की स्थापना संधियों के आधार पर न हो कर अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के अंगों के संकल्पों के आधार पर भी  की जाती है।अंतर्राष्ट्रीय संगठन मूलतः दो प्रकार के होते हैं-

अंतर्राष्ट्रीय गैर सरकारी (अशासकीय ) संगठन (INGOs):  ऐसे संगठन होते हैं जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गैर सरकारी संगठनों के रूप में कार्यरत् होते हैं। ऐसे संगठन  अंतर्राष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन होते हैं। जैसे- अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति, स्काउट मूवमेंट का विश्व संगठन, इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रास और मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स।
विश्व बैंक के अनुसार  गैर-सरकारी संगठन  ऐसे निजी संगठन होते है जो समस्याओं के समाधान, निर्धनों के हितों का संवर्धन, पर्यावरण के संरक्षण, बुनियादी सामाजिक सेवाओं को उपलब्ध कराने और समुदाय विकास  की जिम्मेदारी लेता है। एक अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन का भी गैर-सरकारी संगठनों की ही भाँति मिशन होता है लेकिन अंतर सिर्फ इतना है कि यह अपने आकार, प्रकृति, उद्देश्य में अंतर्राष्ट्रीय होता है और कई देशों में विशिष्ट मुद्दों से जुड़ने के लिए तत्पर्य होता है।

कुछ प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन हैं-
कर्न्सन वर्ल्डवाइड, मर्सी कार्प्स, वर्ल्ड विजन इंटरनेशनल, डाक्टर्स विदाउट बार्डर्स, हेल्थ राइट इंटरनेशनल, चैरिटी वाटर, कंपैसन इंटरनेशनल, प्लान, इंटरनेशनल सेव द चिल्ड्रेन अलायन्स, एसओएस चिल्ड्रेन्स विलेजेज, एक्शन एंड, एमनेस्टी इंटरनेशनल, सरवाइवल इंटरनेशनल, आईयूसीएन, ग्रीनपीस आदि। अंतर्राष्ट्रीय संगठन ऐसी इकाईयाँ होती हैं जिनकी स्थापना उनके सदस्यों के बीच औपचारिक राजनीतिक सहमतियों के आधार पर होती है और इन राजनीतिक सहमतियों (Political Agreements) की प्रास्थिति अंतर्राष्ट्रीय संधियों की होती है। इनका अस्तित्व इनके सदस्य राष्ट्रों के द्वारा विधि द्वारा मान्यता प्राप्त होता है और ये देशों के निवासीय संस्थात्मक इकाइयों (Resident Institutional Units) के रूप में नहीं माने जाते, जिनमें वे अवस्थित होते हैं।

अंर्तसरकारी संगठन   (Intergovernmental Organizations):  जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय सरकारी संगठन (IGOs) के रूप में भी जाना जाता है, इस प्रकार के संगठन होते है जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगठन शब्दावली के साथ संबंधित माना जाता है। ये ऐसे संगठन होते हैं जो मुख्यतया संप्रभु राज्यों (सदस्य राज्यों के रूप में निरूपित) से मिलकर बने होते हैं। इसके प्रमुख उदाहरण है, संयुक्त राष्ट्र संघ, ऑर्गनाइजेशन फार सिक्योरिटी एण्ड को-आपरेशन इन यूरोप, काउन्सिल ऑफ यूरोप, यूरोपियन यूनियन, यूरोपियन पेटेन्ट आरगनाइजेशन और विश्व व्यापार संगठन।

संयुक्त राष्ट्र संघ

संयुक्त राष्ट्र संघ  एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय क़ानून को सुविधाजनक बनाने के सहयोग, अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, मानव अधिकार और विश्व शांति स्थापित करना  है। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 24 अक्टूबर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र अधिकार पत्र पर 50 देशों के हस्ताक्षर होने के साथ हुई। आज विश्व के हर देश एक-दूसरे पर अधिकार जमाने के लिए खड़े रहते हैं। कई देशों में आंतरिक कलह इतना अधिक हो चुका है कि वहां मानवीय मूल्यों की आहुति दी जा रही है। कई देशों में तानाशाहों का आतंक है तो आतंकवादी आए दिन लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं। इन सबको नियंत्रण में करने के लिए हर देश अपने स्तर पर तो काम करते ही हैं साथ ही इन सबके ऊपर नजर रहती हैं दुनिया के सबसे बड़ी संघ की। संयुक्त राष्ट्र संघ के नाम से प्रसिद्ध यह अंतरराष्ट्रीय संस्थान जाति, धर्म और देश से ऊपर उठकर पूरे संसार के कल्याण के लिए काम करता है।

उद्देश्य
संयुक्त राष्ट्र का मुख्य उद्देश्य विश्व में युद्ध रोकना, मानव अधिकारों की रक्षा करना, अंतरराष्ट्रीय कानून को निभाने की प्रक्रिया जुटाना, सामाजिक और आर्थिक विकास उभारना, जीवन स्तर सुधारना और बीमारियों से लड़ना है। इस संगठन ने दुनिया भर में कई अहम मौकों पर मानव जीवन की सेवा कर एक आदर्श प्रस्तुत किया है।

संक्षिप्त इतिहास
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1929 में राष्ट्र संघ का गठन किया गया था। संयुक्त राष्ट्र संघ से पूर्व, पहले विश्व युद्ध के बाद राष्ट्र संघ (लीग ऑफ़ नेशंस) की स्थापना की गई थी। इसका उद्देश्य किसी संभावित दूसरे विश्व युद्द को रोकना था, लेकिन राष्ट्र संघ 1930 के दशक में दुनिया के युद्ध की तरफ़ बढ़ाव को रोकने में विफल रहा और 1946 में इसे भंग कर दिया गया। राष्ट्र संघ के ढांचे और उद्देश्यों को 'संयुक्त राष्ट्र संघ' ने अपनाया। 1944 में अमरीका, ब्रिटेन, रूस और चीन ने वाशिंगटन में बैठक की और एक विश्व संस्था बनाने की रूपरेखा पर सहमत हो गए। इस रूपरेखा को आधार बना कर 1945 में पचास देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई। फिर 24 अक्टूबर, 1945 को घोषणा-पत्र की शर्तों के अनुसार 'संयुक्त राष्ट्र संघ' की स्थापना हुई। संयुक्त राष्ट्र संघ में 193 सदस्य हैं। राष्ट्रों के स्वतंत्र होने के साथ ही पूर्व सोवियत संघ के विघटन के बाद इसके सदस्यों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हुई। संयुक्त राष्ट्र संघ को चलाने के लिए सदस्य देश योगदान करते हैं। किसी देश की क्षमता के आधार पर योगदान तय किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका का योगदान सबसे अधिक है। संयुक्त राष्ट्र की कई स्वतंत्र संस्थाएं भी हैं जो हर मुद्दे को अलग अलग स्तर पर सुलझाती हैं- जैसे खाद्य एवं कृषि संगठन, अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ, विश्व बैंक, यूनेस्को, विश्व स्वास्थ्य संगठन, आदि।

संयुक्त राष्ट्र संघ की संरचना


संयुक्त राष्ट्र संघ के 6 प्रमुख अंग है, जो  इस प्रकार है:-
1  महासभा
2  सुरक्षा परिषद
3  आर्थिक और सामाजिक परिषद
4  प्रन्यास परिषद
5  अन्तराष्ट्रीय न्यायालय
6  सचिवालय।

संयुक्त राष्ट्र संघ से संबंधित अन्य संस्थाएँ, इस प्रकार है
1.अन्तराष्ट्रीय विकास संघ
2.संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संस्था
3. व्यापार तथा विकास हेतू संयुक्त राष्ट्र सम्मलेन
4.व्यापार तथा सीमा शुल्क पर सामान्य समझौता
5.अन्तराष्ट्रीय कृषि विकास कोष
6.विश्व बौद्धिक संपत्ति संस्था
7.संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम
8.अन्तराष्ट्रीय दूरसंचार उपग्रह संघ
9.संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या गतिविधियों से सम्बद्ध कोष।

संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय

संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय न्यूयार्क में है। 14 दिसंबर, 1946 को संयुक्त राष्ट्र ने अपना मुख्यालय संयुक्त राज्य अमेरिका में रखने के पक्ष में मतदान किया। न्यूयार्क में ईस्ट नदी  के किनारे सात हेक्टेयर भूमि खरीदने के लिए अमेरिका के जॉन डी. रॉकफेलर जूनियर ने 85 लाख डॉलर की रकम दान में दी। नगर प्रशासन द्वारा भी उस क्षेत्र में कुछ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध करायी गयी। संगठन की इमारत 1952 में बनकर तैयार हुई। न्यूयार्क के लांग आईलैंड में लेक सक्सेस पर अस्थायी मुख्यालय बनाया गया था। 10 जनवरी, 1946 को लंदन में महासभा का प्रथम सत्र आयोजित हुआ था।

संयुक्त राष्ट्र संघ का ध्वज

संयुक्त राष्ट्र के ध्वज को 1947 में आधिकारिक प्रतीक के रूप में अंगीकृत किया गया। ध्वज में हल्के नीले रंग की पृष्ठभूमि के अंतर्गत सफेद रंग से विश्व के वृत्ताकार मानचित्र को दर्शाया गया है, जो जैतून की शाखाओं के हार द्वारा घिरा हुआ है। जैतून की शाखाएं शांति का प्रतीक हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा


महासभा संयुक्त राष्ट्र संघ का सबसे अहम हिस्सा है। महासभा किसी भी मुद्दे पर बहस के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रमुख मंच है। संयुक्त राष्ट्र संघ में यह एक अकेली संस्था है जिसमें सभी देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। प्रत्येक सदस्य का एक वोट होता है। संयुक्त राष्ट्र संघ में सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ के बजट तक किसी भी मुद्दे पर विचार विमर्श कर सकते हैं। महासभा विचार-विमर्श के बाद अपनी सिफ़ारिशें जारी कर सकती है लेकिन वो किसी देश को इन सिफ़ारिशों को मानने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। महासभा, सदस्य देशों के बीच बड़ी चिंताओं को घोषणा के रूप अपना सकती है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद


सुरक्षा परिषद को विश्व शांति और सुरक्षा बनाए रखने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। अमरीका, रूस, चीन, फ़्रांस और ब्रिटेन इसके पांच स्थाई सदस्य है। सुरक्षा परिषद के पांचों स्थाई सदस्यों के पास कई अहम अधिकार होते हैं।  1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय  उसके सदस्यों की संख्या 50 थी, जो आज बढ़कर 193 हो गई है।

संयुक्त राष्ट्र और भारत


भारत, संयुक्त राष्ट्र के उन प्रारंभिक सदस्यों में शामिल था जिन्होंने 01 जनवरी, 1942 को वाशिंग्टन में संयुक्त राष्ट्र घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे तथा 25 अप्रैल से 26 जून, 1945 तक सेन फ्रांसिस्को में ऐतिहासिक संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय संगठन सम्मेलन में भी भाग लिया था। संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत, संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और सिद्धांतों का पुरजोर समर्थन करता है और चार्टर के उद्देश्यों को लागू करने तथा संयुक्त राष्ट्र के विशिष्ट कार्यक्रमों और एजेंसियों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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