आतंकी फंडिंग रोकने के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय एजेंसी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर वह इस संबंध में मान्य अंतरराष्ट्रीय नियमों को लागू नहीं करता है तो उसे अक्टूबर, 2019 में प्रतिबंधित किया जा सकता है। पाकिस्तान को जून, 2018 में एफएटीएफ ने निगरानी सूची (ग्रे लिस्ट) में रखा था। पिछले दो दिनों से अमेरिका में चल रही बैठक में इस एजेंसी ने पाकिस्तान को निगरानी सूची में ही रखने का फैसला किया है। वैसे पाकिस्तान में सरकार और मीडिया इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर प्रचारित कर रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि पाकिस्तान अभी भी खतरे से बाहर नहीं है।
 
 
क्या है 
  1. भारत की कूटनीतिक कोशिश यही थी कि इसी बैठक में पाकिस्तान पर प्रतिबंध लग जाए। इस तरह की सूचनाएं आ रही हैं कि तुर्की, मलेशिया और चीन की वजह से पाकिस्तान को प्रतिबंधित सूची में नहीं डाला जा सका। 
  2. कुछ दिन पहले ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद से आग्रह किया था कि वह एफएटीएफ का सदस्य होने के नाते पाकिस्तान को निगरानी सूची से बाहर आने में मदद करे।
  3. निगरानी सूची से बाहर आने के लिए पाकिस्तान को 36 सदस्यीय एफएटीएफ में 15 देशों का समर्थन चाहिए। अब इस एजेंसी की अगली बैठक अक्टूबर में होगी। तब फिर पाकिस्तान द्वारा आतंकी फंडिंग या संदेहास्पद वित्तीय लेन-देन रोकने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा होगी।
  4. इस हफ्ते की बैठक में भी अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस जैसे देशों ने पाकिस्तान में जारी कई आतंकी संगठनों की वित्तीय गतिविधियों पर चिंता जताई। खास तौर पर जिस तरह अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित हाफिज सईद और मसूद अजहर की गतिविधियां जारी हैं, उस पर आपत्ति जताई गई।
  5. पाकिस्तान की तरफ से हाल के दिनों में कई आतंकी संगठनों के खिलाफ उठाए गए प्रतिबंधों से संबंधित सुबूत पेश किए गए। पाकिस्तान ने बताया कि विभिन्न आतंकी संगठनों की तकरीबन 700 परिसंपत्तियों को जब्त किया गया है। लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त करने के लिए काफी नहीं है।
  6. एफएटीएफ की तरफ से पिछले वर्ष पाकिस्तान को 25 मानक दिए गए थे जो उसे निगरानी सूची से बाहर आने के लिए अनिवार्य थे। लेकिन अभी तक पाकिस्तान इसमें से दो-तीन मानकों को ही पूरा कर पाया है। 

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