नये भारत का गेम-चेंजर

स्रोत: द्वारा राजीव सिंह: राष्ट्रीय सहारा

सभी की आंखें 2019 के केंद्रीय बजट पर लगी थीं क्योंकि शानदार जीत हासिल करके सत्तारूढ़ हुई मोदी-2 सरकार का प्रथम बजट था, और इसने निराश नहीं किया। देश की प्रथम पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री अपना पहला बजट पेश करते समय एकाउंटेंट की बजाय राष्ट्र निर्माता की भूमिका में ज्यादा दिखीं। उनके बजट में भविष्योन्मुखी योजनाओं और विकासात्मक रणनीति के माध्यम से नये भारत के निर्माण का संकल्प दिखता है।

मोदीनॉमिक्स ने भारत को महाशक्ति बनाने के सपने को मूर्ताकार करने के लिए विवेकशील पथ चुना है। भारत को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में पचपन वर्ष लगे और मोदी-एक ने इसमें पांच वर्ष के कार्यकाल में एक ट्रिलियन और का इजाफा कर लिया। अब मोदी-दो सरकार ने ऐसा मंसूबा बांधा है, जिसके बारे में कभी किसी ने सोचा तक न था। मोदी-दो सरकार आने वाले पांच वर्षो में अर्थव्यवस्था के आकार में 2.3 ट्रिलियन डॉलर बढ़ोतरी करने का लक्ष्य हासिल करना चाहती है ताकि भारत पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था वाले देशों के विशिष्ट समूह में शामिल हो सके।

यकीनन सफर आसान नहीं होगा और रास्ता सुगम नहीं है। लेकिन भारत की वित्त मंत्री ने यह लक्ष्य हासिल करने का व्यवहार्य रास्ता अपनाया है। वित्त मंत्री द्वारा चाणक्य नीति को उद्धृत किया जाना-‘‘संकल्पबद्ध मानव प्रयासों से कार्य यकीनन पूरा होगा ही’-वाकई में माकूल है। प्रत्येक वर्ग के लोगों पर तवज्जो देने वाला यह समावेशी बजट है, जिसमें अर्थव्यवस्था के महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार, वित्तीय क्षेत्रमें विास बहाली, डिजिटल इंडिया, रेलवे एवं ढांचागत क्षेत्र में भविष्य की जरूरतों के मद्देनजर आवंटन तथा राजकोषीय अनुशासन बजट में दिखते हैं, जो संकेत हैं कि सरकार भावी पीढ़ियों के लिए जीवंत अर्थव्यवस्था बनाने के रास्ते पर चल पड़ी है। अनेक महत्त्वपूर्ण उद्योगों के लिए मांग आवासन क्षेत्र से निकलती है। किफायती आवास क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने आवास निर्माताओं को लाभ पर टैक्स होलिडे की घोषणा की है।

इस क्षेत्र को और प्रोत्साहन के लिए 45 लाख रुपये तक का आवास लेने पर ऋण पर ब्याज में डेढ़ लाख रुपये तक की अतिरिक्त कटौती की घोषणा की गई है। सरकार प्रमुख पहल के रूप में केंद्रीय मंत्रालयों और केंद्र के सार्वजनिक उपक्रमों के पास पड़ी जमीन पर सार्वजनिक सुविधाएं तथा किफायती आवास परियोजनाएं क्रियान्वित करेगी। अर्थव्यवस्था के समग्र विकास में माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। इस तय के दृष्टिगत सरकार ने इस क्षेत्र के नकदी का प्रवाह सुनिश्चित करने के पर्याप्त उपाय किए हैं।

नये/इंक्रीमेंटल ऋण पर ब्याज में 2 प्रतिशत अनुदान तथा 25 प्रतिशत की कम कर दर अनुम्य बनाने के लिए कारोबारी सीमा बढ़ाया जाना सही दिशा में उठाया गया कदम है। एमएमएमई के लिए ज्यादा वित्त व्यवस्था के लिए भागीदार बढ़ाने खासकर टीआरईडीएस (ट्रेड रिसीवेबल डिककाउंटिंग सिस्टम) प्लेटफॉर्म पर एनबीएफसी-फैक्टर के रूप में अपंजीकृत एनबीएफसी को शामिल करने की योजना है।

आगामी पांच वर्षो में जीडीपी में आठ प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करके ही पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। इस वृद्धि दर को हासिल करने के लिए सालाना जीडीपी का करीब 7-8 प्रतिशत आंवटन ढांचागत क्षेत्रके लिए किया जाना आवश्यक है। ढांचागत क्षेत्र पर 100 ट्रिलियन रुपये का आवंटन किए जाने से आर्थिक वृद्धि मजबूत होगी और नतीजतन रोजगार सृजन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भारतमाला, सागरमाला, रेलवे के अत्याधुनिकरण और उड़ान जैसे महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रमों को जारी रखने और इनमें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड अपनाने की मंशा का इन क्षेत्रों का कायाकल्प हो जाने वाला है।

बैंकों की बैलेंस शीट को मजबूत करने तथा ऋण प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकार सार्वजनिक बैंकों के लिए 70 हजार करोड़ रुपये मुहैया कराएगी। बैंकों को इतना पैसा मिलने की उम्मीद नहीं थी। एनबीएफसी क्षेत्र में नकदी के प्रवाह का संकट दूर करने के लिए सरकार ने एनबीएफसी के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम आरंभ की। सरकार ने चालू वर्ष के लिए 1.05 लाख करोड़ रुपये के विनिवेशीकरण का लक्ष्य रखा है। इस महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के साथ ही आश्वासन दिया है कि सार्वजनिक उपक्रमों में वह प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अपनी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखेगी।

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य सरकारी परिव्यय के वित्त पोषण के लिए बाह्य ऋणों का इस्तेमाल कर सकती है। विदेशी मुद्रा में ये ऋण प्राप्त होंगे और हमारा मानना है कि इससे घरेलू पूंजीगत लागत को कम करने की दिशा में यह सकारात्मक कदम होगा जिससे बैंकों में एसएलआर के रूप में पड़े रहने वाले ट्रिलियन रुपयों का इस्तेमाल हो सकेगा। वन नेशन वन ग्रिड की अवधारणा के तहत ऊर्जा, गैस, जल, हाइवे और वायुमागरे के बीच समन्वय का मंसूबा पूरा किया जाना ही नये भारत की आकांक्षा में झलकता है।

भूमिगत जल के गिरते स्तर, पिघलते ग्लेशियर, प्रदूषित होतीं नदियों और दिनोंदिन गायब होतीं झीलों के मद्देनजर सरकार ने इस बजट में महत्त्वपूर्ण उपायों की घोषणा की है ताकि जल संरक्षण की दिशा में सहायता मिल सके। यह एक सराहनीय पहल है। अलबत्ता, कुछ चूक भी रहीं। स्पेशल एडिश्नल एक्साइज ड्यूटी लेवी तथा रोड एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को इस क्रम में गिनाया जा सकता है। इसी प्रकार, बेशकीमती धातुओं और सोने के आयात पर शुल्क बढ़ाया गया है। इससे आम जन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

बहरहाल, तमाम कमियों के बावजूद बजट अर्थव्यवस्था के महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को मजबूती देगा। इसमें नये भारत की झलक मिलती है। वित्त मंत्री के बजट प्रस्तावों के पीछे मंशा है कि निवेश चक्र में तेजी आए। ढांचागत विकास को गति मिले, विदेशी पूंजी को ज्यादा से ज्यादा आकर्षित किया जा सके। डिटिजल इंडिया की पहलों की दिशा में उत्तरोत्तर बढ़त मिले। हमारे शैक्षणिक संस्थान विश्वस्तरीय बन सकें। कारोबारी सुगमता के लिहाज से हमने अभी तक खासी अच्छा प्रदर्शन किया है, और बजट में कोशिश दिखी कि यह सिलसिला और भी मजबूती से आगे बढ़े। वित्तीय घाटे से समझौता किए बिना वास्तव में यह गेम-चेंजर बजट है।

 

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