दिखेगा लाभप्रद परिदृश्य

स्रोत: द्वारा जयन्तीलाल भण्डारी: राष्ट्रीय सहारा

यकीनन नये वर्ष 2019 से भारत में तेजी से विकसित होते हुए नये शहरों का लाभप्रद परिदृश्य दिखाई देगा। इन दिनों पूरी दुनिया में विश्व के प्रतिष्ठित थिंकटैंक ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के द्वारा हाल ही में प्रकाशित दुनिया के 780 बड़े और मझोले शहरों की बदलती आर्थिक तस्वीर और आबादी की बदलती प्रवत्ति को लेकर प्रकाशित की गई रिपोर्ट को गंभीरतापूर्वक पढ़ा जा रहा है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2019 से 2035 तक दुनिया के शहरीकरण में काफी बदलाव देखने में आएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय दुनिया के अधिकांश विकसित शहर न्यूयॉर्क, टोक्यो, लंदन, लॉस एंजिलिस, बीजिंग, पेरिस, दिल्ली, मुंबई तथा कोलकोता दुनिया में अपना दबदबा बनाए रखेंगे। लेकिन तेजी से विकसित होते हुए नये नियंतण्र शहरों की रफ्तार के मामले में टॉप के 20 शहरों में से पहले 17 शहर भारत के होंगे और उनमें भी सबसे पहले दस शहर भारत के ही होंगे।

पहले 10 शहरों में सूरत, आगरा, बेंगलूरू, हैदराबाद, नागपुर, त्रिपुरा, राजकोट, तिरु चिरापल्ली, चेन्नई और विजयवाड़ा चमकीले नियंतण्र शहरों के रूप में दिखाई देंगे। निस्संदेह भारतीय शहरों के बारे में जो अध्ययन रिपोर्ट्स प्रस्तुत हो रही हैं, उनसे शहरीकरण से संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण तय उभर कर सामने आ रहे हैं। भारत में तेजी से बढ़ती जनसंख्या और तेज गति से होते विकास के कारण तीव्र शहरीकरण को नहीं रोका जा सकता है। जहां एक ओर गांवों से रोजगार की चाह में लोगों का प्रवाह तेजी से शहरों की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर मध्यम वर्ग के लोग प्रमुखतया शहरों में ही रहना पसंद करते हैं।

निश्चित रूप से कल का उपेक्षित और गुमनाम भारतीय मध्यम वर्ग आज देश और दुनिया की आंखों का तारा बन गया है। भारत का मध्यम वर्ग जहां देश को आर्थिक महाशक्ति बनाने का सपना लेकर आगे बढ़ रहा है, वहीं वह अपनी खरीदारी क्षमता के कारण पूरी दुनिया को भारत की ओर आकर्षित भी कर रहा है। देश की ऊंची विकास दर के साथ-साथ शहरीकरण की ऊंची वृद्धि दर के बलबूते भारत में मध्यम वर्ग के लोगों की आर्थिक ताकत तेजी से बढ़ी है। वर्ष 1991 से शुरू हुए आर्थिक सुधारों के बाद देश में मध्यम वर्ग के लोगों की संख्या और खरीदी की क्षमता चमकीली ऊंचाई पर पहुंच गई है, और चारों ओर भारतीय मध्यम वर्ग का स्वागत हो रहा है।

नेशनल इंस्टीटय़ूट फॉर अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में देश में उच्च-मध्यम वर्ग के 17 करोड़ लोग पूरे देश में 46 फीसदी क्रेडिट कार्ड, 49 फीसदी कार, 52 फीसदी एसी तथा 53 फीसदी कंप्यूटर के मालिक हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय उच्च-मध्यम वर्ग के लोगों की संख्या बढ़कर 27 करोड़ से अधिक है। इस विशालकाय मध्यम वर्ग की आंखों में उपभोग और खुशहाली के जो सपने हैं, उनको पूरा करने के लिए देश-विदेश की बड़ी-बड़ी कंपनियां अपनी नई रणनीतियां बना रही हैं। यकीनन इससे भी भारत में शहरीकरण के नये आयाम दिखाई देने लगे हैं।

निश्चित रूप से देश में बढ़ते हुए औद्योगिकरण और कारोबार विकास के कारण भी शहरीकरण की रफ्तार बढ़ रही है। इस समय एशिया-प्रशांत के देशों में भारत सबसे तेजी से तरक्की करने वाला देश बन गया है। अंतरराष्ट्रीय थिंकटैंक लेगाटम इंस्टीटय़ूट के 12वें सालाना नियंतण्र समृद्धि सूचकांक में भारत 19 पायदान की लंबी छलांग लगाते हुए 94 स्थान पर पहुंच गया है। 2013 में भारत इस सूची में 113 वें नम्बर पर था। कारोबार सरलता से भी देश के शहरों का विकास बढ़ रहा है।

विश्व बैंक की ताजा ईज ऑफ डूईग बिजनेस रिपोर्ट-2018 में भारत ने 23 रैंक की छलांग लगाई है। भारत अब 100 नम्बर से चढक़र 77वें पायदान पर आ गया है। यहां कंस्ट्रक्शन परमिट, सीमाओं में व्यापार, व्यवसाय की शुरु आत, क्रेडिट लेने, बिजली लेने जैसे 6 मापदंडों में बड़ा सुधार हुआ है। भारत एशिया में चौथे नम्बर पर है, जबकि 4 साल पहले यह छठे स्थान पर था। इसी तरह भारत के नियंतण्र प्रतिस्पर्धा सूचकांक में भी सुधार हुआ है। विश्व आर्थिक मंच के नियंतण्र प्रतिस्पर्धा सूचकांक 2018 में भारत पांच स्थान ऊपर चढ़कर 58वें स्थान पर पहुंच गया है।

भारत की रैंकिंग में पांच स्थान की वृद्धि जी-20 देशों के बीच सर्वाधिक बढ़ोतरी है। मंच ने यह भी कहा है कि भारत दक्षिण एशिया में महत्त्वपूर्ण अर्थव्यवस्था बना हुआ है। एक ऐसे समय में जब दुनिया के देश शहरीकरण से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का सामना करने और अपने देश के शहरों को नियंतण्र लाभ लेने के लिए सजाने और संवारने की दृष्टि से योजनाएं बना रहे हैं, तब हमें भी देश में मौजूदा शहरों को उपयुक्त बनाने और अच्छे नये शहरों के निर्माण के लिए तेजी से कदम बढ़ाने होंगे। इस लिहाज से सबसे पहले तो यह जरूरी है कि शहर सुनियोजित रूप से विकसित हों। शहर आधुनिक बुनियादी सुविधाओं, यातायात और संचार साधनों से सुसज्जित हों।

शहरों में विकास की मूलभूत संरचना, मानव संसाधन के बेहतर उपयोग, जीवन की मूलभूत सुविधाओं तथा सुरक्षा कसौटियों के लिए सुनियोजित प्रयास करना अति आवश्यक हैं। हमें नये शहरों की मौजूदा नई जरूरतों के लिए रोडमैप बनाना होगा। नये शहरों में सड़क का उपयुक्त मॉडल अपनाया जाना होगा। नये शहरों को तत्परता से निर्मिंत करने के लिए सरकार के द्वारा आसान कर्ज के साथ-साथ निजी क्षेत्र से निवेश का सार्थक प्रयास करना होगा। निश्चित रूप से नये शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल उपयुक्त होगा।

निश्चित रूप से ऑक्सफोर्ड इकोनामिक्स की नई रिपोर्ट भारत के तेजी से विकसित होते शहरों के विकास की दृष्टि से अति महत्त्वपूर्ण है। नियंतण्र जरूरतों की पूर्ति करने वाले शहरों के विकास की दृष्टि से भारत के लिए यह एक अच्छा संयोग है कि अभी देश में ज्यादातर शहरी ढांचे का निर्माण किया जाना बाकी है। और शहरीकरण की चुनौतियों के मद्देनजर देश के पास शहरी मॉडल को परिवर्तित करने और बेहतर सोच के साथ शहरों के विकास का पर्याप्त समय अभी मौजूद है। हम आशा करें कि सरकार देश के शहरों को एक बेहतर सोच, दृढ़ इच्छाशक्ति और सुनियोजित रणनीति से सजाएगी-संवारेगी ताकि हमारे ये नये शहर राष्ट्रीय और नियंतण्र जरूरतों की पूर्ति के अनुरूप लाभप्रद दिखाई दें और देश के आर्थिक विकास की बुनियादी ताकत बन जाएं।

 

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