कारोबारी दायरे की चिंताएं

स्रोत: द्वारा जयंतीलाल भंडारी: जनसत्ता

पांच दिसंबर को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में विश्व बैंक द्वारा ‘ग्लास हॉफ फुल : प्रॉमिस आफ रीजनल ट्रेड इन साउथ एशिया’ नामक जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान और भारत दोनों के बीच मौजूदा व्यापार अपनी पूरी क्षमता से काफी कम है। भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार दो अरब डॉलर से बढ़ कर सैंतीस अरब डॉलर पर पहुंच सकता है, बशर्ते दोनों देश अड़चनों, आपसी भरोसे की कमी, जटिल और अपारदर्शी गैर-शुल्कीय उपायों को खत्म करने के लिए उपयुक्त कदम उठाएं। विश्व बैंक की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की दक्षिण एशिया के साथ व्यापार की क्षमता 39.7 अरब डॉलर की है, जबकि अभी वास्तविक व्यापार 5.1 अरब डॉलर है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान और भारत की सरकारों द्वारा करतारपुर गलियारे को खोलने से भरोसे की कमी को दूर किया जा सकेगा और दोनों देशों के बीच व्यापार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

विश्व बैंक की रिपोर्ट कहती है कि दक्षिण एशिया के देशों (भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान) का अंतरक्षेत्रीय व्यापार दुनिया के अन्य सभी क्षेत्रों के आपसी कारोबार की तुलना में सबसे कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2017-18 में भारत का दक्षिण एशिया के साथ कारोबार करीब उन्नीस अरब डॉलर रहा है, जबकि दक्षिण एशिया क्षेत्र के पड़ोसी देशों के साथ भारत की कुल कारोबार क्षमता करीब बासठ अरब डॉलर की है।

इसका मतलब यह है कि भारत पड़ोसी देशों के साथ कारोबार क्षमता का महज इकत्तीस फीसद कारोबार ही कर पा रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दक्षिण एशिया में भारत का विदेश व्यापार भारत के कुल वैश्विक विदेश व्यापार का महज तीन फीसद है। निसंदेह यह विडंबना ही है कि कारोबार की अपार संभावनाएं रखने वाला दक्षिण एशिया आपसी विदेश व्यापार में बहुत पीछे है। ऐसा खासतौर पर इसलिए है क्योंकि इस क्षेत्र के दो बड़े देशों- भारत और पाकिस्तान के बीच निरंतर विवाद की स्थिति बनी रहती है। भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी भरोसा और विश्वास का संकट बने रहने के कारण ही सात दशक बीत जाने के बाद भी दोनों देशों के बीच आपसी कारोबार निराशाजनक स्थिति में है। हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने आपसी रिश्ते को बातचीत से व्यापार तक ले जाने का इरादा जताया है, लेकिन उसके तत्काल बाद सीमा पर लगातार गोलीबारी के कारण नए व्यापार संबंधों की संभावनाएं क्षीण हो गई हैं।

पिछले महीने करतारपुर गलियारा खोले जाने के बाद भी पाकिस्तान की वैमनस्यता की नीति के कारण आपसी कारोबार बढ़ने की संभावनाएं कम हैं। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के आधार पर व्यापार में एमएफएन (सर्वाधिक तरजीह राष्ट्र) का दर्जा दिया जाता है। एमएफएन का दर्जा दिए जाने पर देश इस बात को लेकर आश्वस्त रहते हैं कि उनके द्वारा आयात किए जाने पर उन्हें आयात संबंधी विशेष रियायतें प्राप्त होंगी। साथ ही उन्हें व्यापार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

भारत ने पाकिस्तान को 1996 में एमएफएन का दर्जा दिया था। पाकिस्तान को जब यह दर्जा मिला तो इसके साथ ही पाकिस्तान को अधिक आयात कोटा देने के साथ उत्पादों को कम व्यापार शुल्क पर बेचे जाने की छूट मिली है। एमएफएन दर्जे के कारण किसी भी स्थिति में पाक के साथ आयात दरों में भेदभाव नहीं किया जा सकता। यदि किसी वस्तु पर आयात कर दस फीसद है तो किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति में भी पाकिस्तान से दस फीसद से अधिक आयात कर नहीं वसूला जा सकता है। डब्ल्यूटीओ का कहना है कि यदि कोई एक देश दूसरे देश को एमएफएन का दर्जा देता है तो दूसरे देश के द्वारा भी पहले देश को एमएफएन का दर्जा दिया जाना चाहिए। हालांकि बाईस साल पहले भारत की ओर से पाक को दिया गया यह दर्जा अब तक एकतरफा है। जबकि पाकिस्तान ने भारत को ऐसा कोई दर्जा नहीं दिया है। पाकिस्तान ने वर्ष 2012 में भारत को एमएफएन का दर्जा देने का एलान किया था, लेकिन अभी तक वो वादा नहीं निभाया है।

जहां पाकिस्तान को एमएफएन का दर्जा देने के बाद भारत के साथ उसका आपसी कारोबार नहीं बढ़ा, वहीं भारत ने जिन दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के सदस्य देशों- श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान को एमएफएन का दर्जा दिया गया है, उनके साथ भारत का विदेश व्यापार तेजी से बढ़ा है। उल्लेखनीय है कि दक्षिण एशियाई देशों ने भौगोलिक, ऐतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक एकजुटता के साथ-साथ प्राकृतिक एवं आर्थिक संसाधनों का कारोबार में लाभ लेने के लिए 1985 में सार्क की स्थापना की थी और फिर 1994 में दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

हालांकि साफ्टा जनवरी 2006 से लागू हुआ। लेकिन अब तक सार्क देशों में हुए व्यापार समझौते का कोई खास प्रभाव आपसी कारोबार पर दिखाई नहीं दे रहा है। दुनिया के अर्थ विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक भारत और पाकिस्तान के बीच सामंजस्य नहीं होगा, तब तक सार्क के मंच पर आर्थिक एवं विकास की प्रबल संभावनाएं साकार नहीं की जा सकती हैं। लेकिन पाकिस्तान के अड़ियल और आतंक को समर्थन देने वाले रुख के कारण व्यापार संबंधों के नए अध्याय लिखे जाने में मुश्किलें आ रही हैं। ऐसे में अन्य दक्षिण एशियाई देशों- श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान के साथ भारत के व्यापारिक संबंध बढ़ाए जाने के लिए उपयुक्त वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार करना अधिक बेहतर होगा।

बीबीआइएन (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल) और बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी में बहुक्षेत्रीय तकनीकी और क्षेत्रीय सहयोग) जैसी उपक्षेत्रीय पहल भारत के लिए कारोबार बढ़ाने के मद्देनजर लाभप्रद होगी। उल्लेखनीय है कि भारत ने पाकिस्तान के विरोध को दरकिनार करते हुए सार्क के भीतर क्षेत्रीय उपसमूह बीबीआइएन की एकसूत्रता पर जोर देकर भारत ने इन देशों के साथ क्षेत्रीय व्यापार बढ़ाया है। ये चारों देश कारोबार को बढ़ावा देने के लिए अंतर-ग्रिड कनेक्टिविटी और जल संसाधन प्रबंधन जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर काफी आगे बढ़े हैं।

बीबीआइएन के साथ अब श्रीलंका और मालदीव को भी समुद्री लिंक से जोड़ने के लिए कदम बढ़ाए गए हैं। वस्तुत: भारत, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के लिए सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है। इसलिए पिछले कई वर्षों से इन देशों के एक-दूसरे से व्यापारिक-औद्योगिक रूप से अधिक निकट आने और बुनियादी ढांचों के मुद्दों पर सामूहिक निर्णय लेने की आवश्यकता अनुभव की जा रही थी। इस समय जब भारत डॉलर संकट का सामना कर रहा है। ऐसे में पड़ोसी देशों में निर्यात बढ़ा कर व्यापार घाटे को कम किए जाने की अच्छी संभावनाएं हैं।

इस परिप्रेक्ष्य में एक ओर भारत के द्वारा बीबीआइएन और बिम्सटेक जैसी उपक्षेत्रीय कारोबार पहल को महत्व देते हुए अधिक व्यवहार्य और अधिक लाभदायक व्यापार संवर्द्धन व्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ाने होंगे। साथ ही, पड़ोसी देशों के साथ बहुपक्षीय व्यापार समझौतों की निराशा के मद्देनजर पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते भी लाभकारी होंगे। उल्लेखनीय है कि 31 अक्तूबर को विश्व बैंक के द्वारा प्रकाशित कारोबारी सुगमता (ईज आफ डूइंग बिजनेस) रिपोर्ट-2019 में कारोबारी सुगमता की वैश्विक रैंकिंग में भारत एक सौ नब्बे देशों की सूची में सतहत्तरवें स्थान पर पहुंच गया। दक्षिण एशिया में भारत कारोबार सुगमता में पहले स्थान पर है। इसलिए कारोबार सुगमता की ऊंची अनुकूलताओं के आधार पर भारत दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के साथ अधिक कारोबार की संभावनाओं को साकार कर सकता है। इससे दक्षिण एशिया में न केवल अरबों डॉलर की कमाई व रोजगार को गति दी जा सकेगी।

 

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