अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पर्यावरण संरक्षण पर हुए ऐतिहासिक पेरिस समझौते से अलग होने का एलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह पर्यावरण के मुद्दे पर नए समझौते के लिए चर्चा करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने इस फैसले के संकेत जी-7 सम्मेलन में पहले ही दे दिये थे।

इस बात की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और चीन के लिए पेरिस समझौते का पालन करना इतना मुश्किल नहीं है जितना अमेरिका के लिए है। इस बीच पेरिस के मेयर ने ट्रंप के इस एलान को बड़ी गलती करार दिया है।

 
क्या है 
  1. करीब 200 देशों के साथ 2015 में पेरिस में पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद अहम समझौता हुआ था। ट्रंप ने विगत शनिवार को इटली के सिसली में संपन्न विकसित देशों के संगठन जी-7 की बैठक में इसके संकेत दिए थे। उन्होंने तब पर्यावरण परिवर्तन समझौते को और बढ़ावा देने से इन्कार कर दिया था। 
  2. भारत, चीन, कनाडा और यूरोपीय संघ ने पेरिस समझौते के तहत किए गए वादे पर टिके रहने की बात कही है। माना जाता है कि ट्रंप ने अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) के प्रशासक और तेल उद्योग जगत के सहयोगी स्कॉट प्रूइट के साथ मिलकर पेरिस समझौते से बाहर होने की शर्तो पर काम किया। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के पेरिस समझौते से मुंह फेरने के फैसले से अमेरिका के अभिन्न सहयोगी समझे जाने वाले यूरोपीय देश भी ट्रंप के फैसले से अलग हो सकते हैं।
  3. तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के अथक प्रयासों के चलते वर्ष 2015 में अमेरिका समेत तकरीबन 200 देशों ने पेरिस में करार पर हस्ताक्षर किया था। इसके तहत साल 2025 तक कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में 26 से 28 फीसद (वर्ष 2005 के स्तर से) तक की कमी लाने पर सहमति बनी थी। साथ ही अविकसित और विकासशील देशों को रियायती दरों पर ग्रीन टेक्नोलॉजी मुहैया कराने के साथ आर्थिक पैकेज देने की भी बात कही गई थी।
  4. पेरिस समझौते से औपचारिक तौर पर हटने में तकरीबन तीन साल का वक्त लगेगा। बहुमत दल के नेता मिच मैक्कोनेल समेत सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी के 22 सीनेटरों ने ट्रंप को पत्र लिखकर करार से हटने का आग्रह किया था। राष्ट्रपति का फैसला उसी से प्रभावित बताया जा रहा है। चीन के बाद अमेरिका दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक देश है
क्या है पैरिस समझौता?
  1. पैरिस जलवायु समझौते को पिछले साल दिसंबर में अंतिम रूप दिया गया था। इससे जुड़े देशों को उन कदमों पर अमल करना होगा, जिससे वैश्विक तापमान में औसत बढ़ोतरी 2 डिग्री से ज्यादा न हो। 
  2. पैरिस अग्रीमेंट के लिए पहल करने वाले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पद छोड़ने से पहले अमल देखना चाहते थे, इसके लिए वह कई देशों से खुद संपर्क में थे। 
  3. यह अनुमान पहले से लगाया जा रहा था कि ट्रंप राज में अमेरिका पैरिस डील से अलग हो जाएगा। ट्रंप काफी पहले से क्लाइमेट चेंज की थिअरी पर ही सवाल उठाते रहे हैं। 
  4. कहा जा रहा है कि पैरिस अग्रीमेंट से अलग होने से पहले अमेरिका को तीन साल का इंतजार करना होगा और एक साल का नोटिस भी देना होगा। 
  5. प्रावधान है कि अमीर देश फॉसिल फ्यूल का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, सो उन्हें इसके मद में गरीब और विकासशील देशों को मदद करनी होगी। 
  6. सीरिया और निकारागुआ को छोड़ कर सभी देश इससे जुड़े हैं। भारत सरकार ने पिछले साल 2 अक्टूबर को पैरिस अग्रीमेंट की पुष्टि कर दी थी। 
  7. कुल उत्सर्जन में भारत का हिस्सा 4 प्रतिशत के करीब है। चुनौती यह है कि सरकार मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा विस्तार देगी। बिजली उत्पादन कोयले पर आधारित है।