यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का धूमकेतु (कॉमेट) अभियान बारह साल बाद खत्म हो गया। रोसेटा यान को 67पी/चुरयुमोव-जेरासिमेंको नामक धूमकेतु की

सतह पर सफलतापूर्वक क्रैश लैंडिंग करा दी गई। इससे पहले यान हाई रिजोल्यूशन ओसिरिस कैमरे से धूमकेतु की सबसे करीब से तस्वीरें लेने में सफल रहा।

 
प्रमुख बिंदु
  1. रोसेटा ने महज 20 मीटर की ऊंचाई से यह तस्वीरें ली हैं। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के मुताबिक यह किसी भी यान द्वारा कॉमेट का अब तक का सबसे समीप से लिया गया फोटो है। इससे पहले 51 मीटर की ऊंचाई से तस्वीर ली गई थी। इन तस्वीरों के मदद से धूमकेतु की बनावट के बारे में पता लगाना आसान हो जाएगा। खासकर गैसीय संरचना, धूल-कण और प्लाजमा के बारे में ज्यादा जानकारी मिलेगी। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इसकी मदद से पृथ्वी की उत्पत्ति के बारे में नई सूचनाएं मिल सकेंगी।
  2. धूमकेतु के साथ चक्कर लगाने वाला रोसेटा यान सौर ऊर्जा से संचालित था। कॉमेट धीरे-धीरे बृहस्पति की कक्षा के साथ सूर्य से दूर जा रहा था। ऐसे में यान को चलायमान रखना संभव नहीं था। इसके अलावा सूर्य महीने भर के लिए पृथ्वी और रोसेटा के बीच आने वाला था। ऐसे में यान से संपर्क साधना मुश्किल हो जाता। रोसेटा को वर्ष 2004 में प्रक्षेपित किया गया था। यह 6 अगस्त, 2014 को धूमकेतु पर पहुंचा था।