रोसेटा पिछले 12 वर्षों में अब तक 6 अरब किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर चुका है। धूमकेतु के ऊपर से गुजरने के बजाय कॉमेट की कक्षा में चक्कर

लगाने वाला रोसेटा पहला यान है। यह सूर्य की रोशनी से ऊर्जा प्राप्त कर रहा है। 

 
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस दौरान रोसेटा काफी नजदीक से धूमकेतु की तस्वीरें ले सकेगा। इससे गैस और धूल-कणों के निर्माण की प्रक्रिया और उनकी रासायनिक संरचना के बारे में जानकारी मिल सकेगी। इस यान की मदद से धूमकेतु की सतह पर नवंबर, 2014 में सौ किलोग्राम वजन वाले रोवर को उतारने में सफलता मिली थी। रीचार्ज नहीं होने के कारण यह नष्ट हो गया था।