अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्लोबल फुट प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक हमने 29 जुलाई तक इस साल यानी 2019 के लिए धरती के समस्त संसाधनों का इस्तेमाल कर लिया है
 
 
साल भर के लिए नियत संसाधन हम सबने इतने कम दिन में ही खत्म कर दिया है। पिछले बीस साल में अर्थ ओवरशूट डे दो महीने आगे आ चुका है। यानी आज से हम उधार के संसाधनों पर जीवित रहेंगे। अंधाधुंध दोहन ने एक धरती से हमारी जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसे पूरा करने के लिए 1.75 धरती की दरकार है2030 यह जरूरत बढ़कर दो पृथ्वी की हो जाएगी
 
क्या है 
  1. 1969 में धरती एक साल में जितना संसाधन तैयार करती थी, पूरी दुनिया उसका इस्तेमाल करीब 13 महीने करती थी। दिन बदले, तस्वीर बदली। आज हम धरती के एक साल के लिए तय संसाधन करीब सात महीने में ही समाप्त कर दे रहे हैं।
  2. अर्थ ओवरशूट डे की अवधारणा ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क तथा ब्रिटेन के न्यू इकोनॉमिक फाउंडेशन द्वारा रखी गयी थी। यह प्रत्येक वर्ष के उस दिवस का सूचक है जिस दिन उस वर्ष के लिए आवंटित प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग मानव ने कर लिया। पहला ओवरशूट डे 2006 मनाया गया था
  3. विकास के नाम पर विनाश की ओर बढ़ रही है दुनिया। दोनों में संतुलन साधने की बात तमाम विशेषज्ञ करते हैं। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए जंगल काटते जा रहे हैं। भू क्षरण जारी है। 
  4. जैव विविधता घट रही है। वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड का जमाव चरम पर होता जा रहा है। इन सबके असर से ग्लोबल वार्मिंग का दैत्य सामने आया है जिसने पूरी जलवायु बदल कर रख दी है।
अर्थ ओवरशूट डे की शुरुआत
  1. 1986 इस दिवस की गणना की जा रही है। तब से हर साल यह दिवस पिछले साल के दिवस से पहले आता जा रहा है। 1993 में यह 21 अक्टूबर को था तो 2003 में 22 सितंबर को और 2017 में 2 अगस्त को तय था
  2. हमें केवल एक पृथ्वी मिली है। यह हमारे अस्तित्व के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। हम विनाशक परिणामों के बिना 1.75 (पृथ्वी) का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

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