वैज्ञानिकों ने एक ऐसे प्रोटीन का पता लगाया है जो डीएनए में हुई क्षति की मरम्मत कर सकता है। उनका कहना है कि अल्फा-साइन्यूक्लिन नामक इस प्रोटीन के जरिये पार्किंसन के अलावा मस्तिष्क संबंधी अन्य रोगों के उपचार के भी नए रास्ते खुलेंगे।
 
 
पहले माना जाता था कि यह प्रोटीन कोशिकाओं में गड़बड़ी और उनकी मृत्यु के लिए जिम्मेदार है। साइंटिफिक रिपोर्ट में छपे शोध के मुताबिक यह प्रोटीन मस्तिष्क संबंधी रोग के कारण नष्ट हो रही तंत्रिका कोशिकाओं को बचा सकता है। चूहों और मानव शव से निकाले गए मस्तिष्क के टिश्यू के अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है।
 
क्या है 
  1. शोधकर्ता विवेश उन्नी ने कहा, ‘यह पहली बार सामने आया है कि अल्फासाइन्यूक्लिन नामक यह प्रोटीन डीएनए की मरम्मत भी करता है। इसकी यह खूबी कोशिकाओं के जीवित रहने के लिए बेहद जरूरी है। 
  2. दरअसल पार्किंसन या अन्य मस्तिष्क रोग में इस प्रोटीन की डीएनए मरम्मत करने की क्षमता कम हो जाती है। इसके कारण तंत्रिका कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं। प्रोटीन की इसी क्षमता को बढ़ाकर पार्किंसन के इलाज का नया रास्ता मिल सकता है।
क्‍या है पार्किंसन
  1. पार्किंसन दिमाग से जुड़ी बीमारी है, जिसमें शरीर के विभिन्न अंगों की गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। गौरतलब है कि दिमाग में न्यूरॉन कोशिकाएं डोपामीन नामक एक रासायनिक पदार्थ का निर्माण करती हैं। जब डोपामीन का स्तर गिरने लगता है, तो दिमाग शरीर के विभिन्न अंगों पर नियंत्रण रख पाने में असक्षम होता है।
  2. अक्सर यह बीमारी उम्रदराज लोगों को होती है, लेकिन आजकल युवाओं में भी यह मर्ज देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में इस वक्त लगभग 70 लाख से 1 करोड़ लोग पार्किंसन बीमारी से प्रभावित हैं। इन आंकड़ों से संदेश मिलता है कि इस संख्या में और भी बढ़ोतरी होगी, खासतौर से एशिया महाद्वीप में। इसका कारण बुजुर्गों की संख्या का बढऩा और आयु में वृद्धि होना है।
  3. पार्किंसन बीमारी को अक्सर डिप्रेशन या दिमागी रूप से ठीक न होने की स्थिति से जोड़ा जाता है, लेकिन इस संदर्भ में यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि इस बीमारी से पीडि़त रोगी मानसिक रूप से विकलांग नहीं होते है। उन्हें समाज से अलग नहीं देखना चाहिए। 
  4. शुरुआती स्टेज पर डॉक्टर लक्षणों को मैनेज करने के लिए दवाओं का सहारा लेते है, लेकिन दवाओं के प्रभावी न होने और इनके साइड इफेक्ट के सामने आने पर अंत में डीप ब्रेन स्टीमुलेशन (डीबीएस) थेरेपी काफी कारगर साबित हुई है।
लक्षण
  1. शारीरिक गतिविधि में सुस्ती महसूस करना
  2. शरीर को संतुलित करने में दिक्कत महसूस करना
  3. शरीर को संतुलित करने में दिक्कत महसूस करना
  4. हंसने और पलकें झपकाने में दिक्कत महसूस करना
  5. बोलने की समस्या और लिखने में दिक्कत महसूस करना
  6. हाथों, भुजाओं, पैरों, जबड़ों और मांसपेशियों में अकडऩ होना
  7. ऐसे पीडि़त लोगों में डिप्रेशन, अनिद्रा, चबाने, निगलने या बोलने जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं
  8. पार्किंसन बीमारी का प्रमुख लक्षण कंपन है, लेकिन 20 प्रतिशत रोगियों में यह लक्षण नहीं भी प्रकट होता
  9. लक्षणों के बदतर हो जाने पर इस रोग से पीडि़त व्यक्ति को चलने-फिरने और बात करने में परेशानी होती है

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