विश्व बैंक ने आंध्र प्रदेश की अमरावती विकास परियोजना के लिए 30 करोड़ डॉलर के कर्ज प्रस्ताव को 'छोड़' दिया। केंद्र सरकार की ओर से कर्ज अनुरोध वापस लेने के बाद बैंक ने यह कदम उठाया। विश्व बैंक ने यह बात कही। इसे लेकर आंध्र प्रदेश के सत्ताधारी दल वाईएसआर कांग्रेस और विपक्षी दल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने एक-दूसरे पर आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं।
 
 
क्या है  
  1. विश्व बैंक के एक अधिकारी ने ई-मेल से भेजे जवाब में कहा , 'भारत सरकार ने प्रस्तावित अमरावती सतत बुनियादी ढांचा एवं संस्थागत विकास परियोजना के वित्तपोषण के लिए विश्वबैंक से किए अपने कर्ज अनुरोध को वापस ले लिया है।
  2. अधिकारी ने कहा कि बैंक के निदेशक मंडल को यह सूचित कर दिया गया है कि सरकार के आदेश के बाद प्रस्तावित परियोजना पर अब तैयारी नहीं की जा रही है। उन्होंने केंद्र के फैसले के पीछे के कारण पर कहा, 'विश्वबैंक भारत सरकार की अंदरूनी बातचीत की प्रक्रिया पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा।
  3. सूत्रों ने कहा कि इस मामले में किसानों की ओर से की गई शिकायतों को बड़े पैमाने पर ध्यान में रखा गया है। किसानों ने अपनी शिकायत में कहा था कि पूर्ववर्ती चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने राजधानी के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण (लैंड पूलिंग) के नाम पर जबरन उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किया। 
  4. चंद्रबाबू नायडू ने विश्व बैंक के कदम के लिए वाईएसआर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं , सरकार के मुख्य सचेतक जी श्रीकांत रेड्डी ने पलटवार करते हुए कहा कि नायडू की ज्यादतियों के कारण विश्वबैंक ने कर्ज देने से मना किया है।