11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन आम लोगों में यह इतना प्रसिद्ध नहीं है। ऐसे में जनसंख्या के मुद्दे के बारे में आम लोगों को जागरूक करना बहुत आवश्यक है। वल्र्ड पॉपुलेशन प्रोस्पेक्ट्स-2019 रिपोर्ट के अनुसार भारत 2027 में चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा। जब भारत गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, पर्यावरण क्षरण, प्रदूषण और कई अन्य चुनौतियों के बोझ तले दबा हुआ है तब जनसंख्या के मामले में दुनिया में अव्वल होना भारत के विकास के सामने कई सवाल खड़े करता है। भारत में तेजी से जनसंख्या वृद्धि के सबसे चुनौतीपूर्ण परिणामों में से एक है शहरीकरण। शहरीकरण कई मायनों में समाज के लिए अच्छा है, लेकिन जब शहरीकरण की प्रक्रिया उचित योजना के बिना आगे बढ़ती है तो यह एक अभिशाप में बदल जाती है।
 
 
क्या है 
  1. भारत में शहरीकरण तेज गति से हो रहा है। 1960 में 18 प्रतिशत की तुलना में अब लगभग 34 प्रतिशत भारतीय शहरों में रहते हैं। हालांकि भारत में शहरी विकास दर काफी धीमी रही है, लेकिन अब इसमें तेजी आने लगी है। 
  2. इससे भारत के शहरों के सामने कई गंभीर चुनौतियां पैदा हो रही हैं। बेहतर अवसरों का स्नोत होने के बावजूद भारत के शहर अत्यधिक असमानता, गरीब और अतिभारित बुनियादी ढांचे तथा असंगत सार्वजनिक सेवाओं से परेशान हैं।
  3. दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में जनसंख्या वृद्धि उनके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे तेज रही है जो आधिकारिक प्रशासनिक सीमाओं से परे के क्षेत्र हैं। 
  4. अधिकांश लोग शहरों में रहने के लाभों को जानते हैं और यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षो में शहरी क्षेत्र अधिक आबादी को आकर्षित करेंगे। इन स्थितियों में भारत की शहरी चुनौतियों पर तथ्यों के साथ चर्चा करना और समझना महत्वपूर्ण हो जाता है।
  5. 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन में पाया गया कि दुनिया के बीस सबसे प्रदूषित शहरों में से चौदह भारत के हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण पर हानिकारक प्रभाव पड़ रहा है। 
  6. ऐसा अनुमान है कि 2016 में भारत में वायु प्रदूषण के कारण 9 लाख से अधिक मौतें हुई थीं। वायु प्रदूषण भौगोलिक सीमाओं को नहीं पहचानता है। जिस तरह ग्रामीण इलाकों से प्रदूषित हवा शहरों में जाती है, वैसे ही शहर भी ग्रामीण प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। इस प्रकार प्रदूषण-विरोधी प्रयासों के लिए विभिन्न स्तरों पर समन्वित होना महत्वपूर्ण है।
  7. भारत के 10 सबसे अधिक आबादी वाले शहरों के नवीनतम वार्ड स्तर की जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि हमें शहरों को देखने के तरीकों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। 
  8. इनमें से अधिकांश शहर, अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के साथ शहर के कुछ क्षेत्रों में उच्च स्तरीय आवासीय अलगाव प्रदर्शित करते हैं। इसके अलावा इन स्थानों पर नल के पानी जैसे सार्वजनिक वस्तुओं की पहुंच भी बहुत कम है। इस असमानता को कम करने के लिए देश की सामाजिक कल्याण नीतियों को कारगर बनाने की आवश्यकता है।

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