जम्मू-कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) की एक रिपोर्ट से भारत सख्‍त नाराज है। वहीं पाकिस्‍तान इस पर इतराया हुआ है। भारत ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे मनगढ़ंत करार दिया है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से झूठ और राजनीति से प्रेरित है। भारत का तर्क है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने इस रिपोर्ट को बनाते समय सीमा पार से जारी आतंकवाद के मुद्दे की अनदेखी की है। भारत ने लिखित में ओएचसीएचआर के समक्ष इस रिपोर्ट को लेकर एतराज जताया है।
 
 
क्या है 
  1. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार का कहना है कि रिपोर्ट में कही गई बातें भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करती हैं। 
  2. यह लोकतांत्रिक भारत की आतंकवाद समर्थक देश से बराबरी करने की काल्पनिक कोशिश है। ओएचसीएचआर ने कश्मीर पर पहले भी अप्रेल में एक रिपोर्ट जारी की थी। 
  3. मौजूदा रिपोर्ट इसकी ही अगली कड़ी है जिसमें दावा किया है कि भारत ने उसकी चिंताओं पर ठोस कदम नहीं उठाया है।
  4. यह रिपोर्ट ऐसे समय पर सामने आई है जब एक दिन पहले ही आतंकी बुरहान वानी की बरसी थी। इस बरसी पर पाकिस्‍तान सेना के प्रवक्‍ता ने उसको हीरो करार दिया। इतना ही नहीं पाकिस्‍तान में इस आतंकी पर फिल्‍म तक बन रही है जिसमें पाकिस्‍तान के टॉप के हीरो बुरहान का किरदार निभा रहे हैं। 
  5. इस रिपोर्ट को बनाते समय संयुक्‍त राष्‍ट्र ने  कश्‍मीर में पत्‍थरबाजी की घटनाएं, स्‍कूलों को जलाए जाने की घटनाएं, जवानों पर हुए आतंकी हमलों की घटनाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है। 
  6. इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में या इससे पहले की भी कई रिपोर्ट में कश्‍मीर के उन पंडि़तों को भी नजरअंदाज किया गया जो कभी यहां के वाशिंदे हुआ करते थे और जिन्‍हें आतंकवाद ने घर छोड़कर जाने पर मजबूर कर दिया।
रिपोर्ट के कुछ खास बिंदु
  1. OHCHR द्वारा जारी रिपोर्ट की दूसरी कड़ी ने भारत की परेशानी को बढ़ाने का काम किया है। जिस रिपोर्ट पर भारत इतना सख्‍त हुआ है उसमें सिर्फ कश्‍मीर को ही लेकर कई तरह की बातें नहीं की गई हैं, बल्कि इसमें तुर्की समेत वेनेजुएला में भी मानवाधिकार हनन की बात भी कही गई है। 
  2. इसमें यूएन अधिकारियों को जम्‍मू कश्‍मीर में भेजे जाने की इजाजत न देने के लिए भारत की आलोचना भी की गई है। इसमें कहा गया है कि यह रिपोर्ट स्‍थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।
  3. रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर के अंत तक OHCHR ने खराब होते मानवाधिकार हालातों के मद्देनजर बीते दिसंबर के अंत तक करीब 77 फील्‍ड प्रजेंस दी। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र के अन्य सदस्यों को वहां पर सहायता प्रदान की गई। यह सहायता वहां पर मौजूद अधिकारी के माध्‍यम से दी गई।
  4. इस रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि वहां की सरकार ने खराब होते मानवाधिकारों पर कोई सकारात्‍मक रवैया नहीं अपनाया या उसे खारिज कर दिया। वहीं इसमें यह भी कहा गया है कि OHCHR ने कश्‍मीर, तुर्की और वेनेजुएला में खराब होती मानवाधिकार की हालात पर करीब से नजर रखी है। यहां के लोगों, पीडि़तों और चश्‍मदीदों से मिली जानकारी के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।
  5. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के कंट्रोल वाले कश्‍मीर में कई बार हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले हैं। वर्ष 2016 के मध्‍य में यूएन हाई कमिश्‍नर ने भारत और पाकिस्‍तान दोनों से ही वहां के हालातों को जानने और निष्‍पक्ष जांच करने को लेकर इजाजत मांगी थी। 
  6. लाइन ऑफ कंट्रोल के दोनों तरफ किसी ने भी इस तरह की इजाजत नहीं दी। जून में जारी एक फाइंडिंग रिपोर्ट में OHCHR ने कश्‍मीर में भारत की तरफ से तैनात की गई फौज और वहां पर सेना द्वारा नागरिकों के मारे जाने या घायल करने, जबरन हिरासत में लेने, नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन किए जाने का जिक्र किया था। इतना ही नहीं यहां लोग आपस में संदेश न भेज सकें इसके लिए भी कम्‍यूनिकेशन ब्‍लैकआउट किया गया था।
  7. 14 जून की इस रिपोर्ट को जहां भारत ने खारिज किया वहीं पाकिस्‍तान ने इसका समर्थन किया था। इसमें कहा गया कि यह रिपोर्ट पूरे विश्‍व का ध्‍यान कश्‍मीर में हो रहे मानवाधिकार के हनन की घटनाओं पर केंद्रित करने में कामयाब रही। 
  8. इस रिपोर्ट का भारत और पाकिस्‍तान में मौजूद कश्‍मीर के अन्‍य दावेदारों और नेताओं ने भी समर्थन किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर में OHCHR ने 15 लोगों के लिए पांच दिनों का ह्यूमन राइट्स मॉनीटरिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम किया था। इसमें मानवाधिकार से जुड़े कार्यकर्ता और वकील शामिल थे। 
  9. इस प्रोग्राम के दौरान कई मानवाधिकार हनन के कई मामले सामने आए। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल होने वाले लोगों का कहना था कि कश्‍मीर पर रिपोर्ट को व्‍यापक विश्‍लेषण के तौर पर पूरी दुनिया के समक्ष रखा जाना चाहिए।
 
 
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