भारत में बन रहे स्वदेशी विमानवाहक पोत के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है और मार्च 2020 तक यह बेसिन ट्रायल (कम गहरे पानी में परीक्षण) के लिए पानी में उतारा जा सकता है। इसके बाद पोत का सी ट्रायल (समुद्र के गहरे पानी में परीक्षण) होगा। इस पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत का नाम आइएनएस विक्रांत होगा। यह जानकारी युद्धपोत निर्माण के नियंत्रक उप नौसेनाध्यक्ष एके सक्सेना ने दी है। वरिष्ठ नौसेना अधिकारी ने बताया- पोत की गैस टर्बाइन संभवत: इस साल की तीसरी तिमाही में शुरू हो जाएंगी। युद्धपोत का निर्माण बड़ी तेजी और सुव्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहा है, इसके निर्धारित समय सीमा में पूरा होने की संभावना है।
 
 
क्या है 
  1. इस पोत को सन 2021 में किसी समय नौसेना को सौंप दिया जाएगा। इससे पहले यह कई परीक्षण पूरे करेगा। युद्धपोत निर्माण से संबंधित सेमिनार के मौके पर वाइस एडमिरल सक्सेना ने सोमवार को यह जानकारी दी।
  2. उन्होंने बताया कि पड़ोसी देशों की तैयारियों को देखते हुए नौसेना को इस विमानवाहक पोत की जरूरत पड़ी है। इससे नौसेना की ताकत में जबर्दस्त इजाफा होगा। इससे समुद्र के मध्य से हवाई हमले की ताकत भी पैदा होती है।
  3. वाइस एडमिरल सक्सेना ने कहा, भारत में युद्धपोतों के निर्माण से नौसेना और तटरक्षक बल को काफी सहूलियत हुई है। स्वदेशी निर्माण से देश को आर्थिक रूप से फायदा हुआ है और हमारी आत्मनिर्भरता बढ़ी है। इससे भारत वैश्विक स्तर पर मुकाबले की स्थिति में खड़ा हुआ है।
  4. वह मर्चेट नेवी के लिए भी आवश्यक जहाज और उपकरण बना रहा है। मेक इन इंडिया अभियान के तहत विकसित हो रही क्षमताओं से बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन भी हो रहा है और विदेशी मुद्रा की बचत भी हो रही है।

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