केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार का राजद्रोह कानून खत्म करने का विचार नहीं है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में राजद्रोह कानून को लेकर कुछ राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने काफी आपत्ति जाहिर की थी। राजद्रोह कानून को सख्त बनाने की जरुरत है। वोट का अधिकार सरकारी नौकरी एवं सुविधाओ से वंचित लोक सभा राज्य सभा सहित किसी भी चुनाव मे लड़ने पर रोक लगनी चाहिये।
 
 
क्या है 
  1. आईपीसी की जिन धाराओं के तहत राजद्रोह कानून लागू है उसे खत्म करने की सरकार की कोई मंशा नहीं है।' बता दें कि राजद्रोह कानून के तहत ही जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार समेत कई अन्य छात्रों पर केस दर्ज किया गया था।
  2. राजद्रोह कानून की कुछ सामाजिक कार्यकर्ता विरोध करते हैं और इसे खत्म करने की मांग कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि राजद्रोह कानून अंग्रेजों के जमाने का कानून था और अब सरकारें इसका मनमाना प्रयोग अभिव्यक्ति की आजादी को खत्म करने के लिए कर रही हैं। 
  3. सरकार सामाजिक-राजनैतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए इस कानून का प्रयोग कर रही है।
क्या है राजद्रोह कानून 
  1. भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A के तहत राजद्रोह कानून है। 
  2. इस कानून के तहत लिखित या मौखित तौर पर, सांकेतिक तरीके, प्रतीक या किसी अन्य माध्यम से सरकार के विरुद्ध नफरत फैलाने, अवमानना करने, राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और अखंडता के विरुद्ध काम करने पर दंडित करने का प्रावधान है। 

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