ईरान ने वैश्विक शक्तियों के साथ उसके परमाणु समझौते के तहत तय की गई संवर्धित यूरेनियम भंडारण की सीमा तोड़ दी है। यह जानकारी विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने दी। इसके साथ ही माना जा रहा है कि ईरान पी5+1 और यूरोपीय संघ के साथ 2015 में हुए ऐतिहासिक समझौते को तोड़ने की दिशा में आगे बढ़ गया है जिस दौरान यूरेनियम भंडारण की सीमा तय की गई थी। उधर, परमाणु कार्यक्रमों पर नजर रखने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी IAEA ने भी ईरान के इस कदम की पुष्टि कर दी है।
 
 
क्या है  
  1. तेहरान को 20 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम की जरूरत है जो हथियार बनाने से एक कदम पहले का स्तर है। जरीफ ने स्थानीय समाचार एजेंसी आईएसएनए कहा, 'ईरान ने अपनी योजना के तहत 300 किलोग्राम की सीमा को पार कर लिया है।' उन्होंने साथ ही कहा कि हमने मई में ही अपनी यह मंशा स्पष्ट कर दी थी।
  2. अमेरिका भी इस समझौते से बाहर निकल चुका है और उसके बाद उसने ईरान पर फिर से कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। अमेरिका के इस कदम के बाद से ही परमाणु समझौता विफल होने की तरफ बढ़ गया था।
  3. यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब गल्फ क्षेत्र में तेल टैंकरों पर संदिग्ध हमले हुएए। अमेरिका ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। इतना काफी नहीं था कि ईरान ने अमेरिका के एक मानवरहित ड्रोन को मार गिराया। 
  4. ईरान का दावा है कि ड्रोन ने उसके एयर स्पेस का उल्लंघन किया था। इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर हमले जैसे कार्रवाई का फैसला कर लिया था जिसे आखिरी वक्त पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बदल दिया। 

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