उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध को बढ़ावा देने की सरकार की पहल को नई शिक्षा नीति से भी ताकत मिली है। नीति में इसके लिए राष्ट्रीय स्तर का एक अनुसंधान फाउंडेशन बनाने की सिफारिश की गई है। जहां शोध से जुड़े कामों का आकलन और उन्हें बढ़ावा देने जैसे काम होंगे। इनमें प्रासंगिक और सामाजिक रूप से उपयोगी अनुसंधान को प्रमुखता से शामिल करने की सिफारिश की गई है।
 
 
क्या है 
  1. नई शिक्षा नीति के प्रस्तावित मसौदे में इसके साथ ही ऐसे उच्च शिक्षण संस्थानों को भी चिन्हित करने पर जोर दिया गया है, जहां मौजूदा समय में शोध कार्यो की गति बेहद सुस्त है। 
  2. ऐसे में इन संस्थानों को नए सिरे से शोध को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही प्रतिष्ठित शोध संस्थानों से सेवानिवृत्त हो चुके विद्वानों का भी एक ग्रुप बनाने की बात कही गई है, जो समय-समय पर शोध से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी राय देगा।
  3. प्रस्तावित नीति के मुताबिक फाउंडेशन शोधकर्ताओं, सरकार, उद्योग और मंत्रालयों के बीच संपर्क का काम करेगा। साथ ही सभी क्षेत्रों में होने वाले शोध कार्यो पर अपनी पैनी नजर भी रखेगा। मौजूदा समय में सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों में होने वाले शोध कार्यो का आपस में कोई भी तालमेल नहीं है।
  4. गौरतलब है कि विश्वस्तरीय दर्जा रखने वाले संस्थानों का चयन उनके शोध प्रदर्शन को देखते हुए किया जाता है। फिलहाल इस प्रस्तावित नीति को लेकर सरकार अभी लोगों की राय लेने में जुटी है। इसके तहत 31 जुलाई तक राय दी जा सकती है।

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