रिफ्यूजी को हम इसलिए याद कर रहे हैं क्योंकि 20 जून को World Refugee Day 2019 है। शरणार्थी, रिफ्यूजी, मुहाजिर चाहे जिस नाम से पुकार लें। लेकिन ये वे लोग हैं जिन्हें किसी न किसी कारणवश अपना देश, अपना घर, अपना सबकुछ छोड़कर दूसरों के रहम-ओ-करम पर जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। किसी न किसी मजबूरीवश अपनी धरती को छोड़कर भागे हुए ये वो अभागे लोग हैं, जिन्हें कोई भी पूरे दिल से स्वीकार नहीं करता। 
 
 
कौन होते हैं रिफ्यूजी?
  1. रिफ्यूजी वे लोग होते हैं जो कभी युद्ध तो कभी उत्पीड़न और कभी आतंकवाद या प्राकृतिक आपदा आदि के कारण अपना सब कुछ पीछे छोड़कर किसी दूसरे देश में शरण लेने को मजबूर होते हैं। 
  2. ये वे लोग हैं जो अपनी जिंदगी की दुश्वारियों से पार पाने की उम्मीद से अपना घर व देश छोड़कर किसी अन्य देश में शरण मांगने पहुंचते हैं। 
  3. दुनियाभर के रिफ्यूजियों के बारे में बात करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस का कहना है, 'मैं बहुत से ऐसे लोगों से मिला हूं, जिन्होंने बहुत कुछ खोया है। लेकिन उन्होंने कभी अपने बच्चों के लिए अपने सपने और बेहतर दुनिया की उम्मीद नहीं खोई।' यानि उन्होंने अपना सबकुछ भले खो दिया हो, लेकिन उम्मीद का दामन थामे रखा है।
रिफ्यूजी दिवस क्यों?
  1. साल 2001 से हर साल 20 जून को विश्व शरणार्थी दिवस मनाया जा रहा है। इन लोगों के साहस, संकल्प और शक्ति के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए यह दिन मनाया जाता है। 
  2. असल में यह एक ऐसा दिन भी है, जो हमें याद दिलाता है कि दुनिया में हमारे जैसे ही लाखों-करोड़ों लोग ऐसे भी हैं जो जिंदगी जीने के लिए हरपल जद्दोजहद करते हैं। 
  3. ये वे लोग हैं जिन्होंने किसी मजबूरी में अपना घर तो छोड़ दिया है, लेकिन जिस दूसरे घर में हैं वहां के लोगों ने अभी तक उन्हें दिल से गले नहीं लगाया है। असल में रिफ्यूजी के रूप में हमारे सामने वे चेहरे होते हैं, जो दयनीय होते हैं। जिनकी आंखों में सपनों से ज्यादा सवाल होते हैं और जो गुमसुम रहकर भी दुनिया से पूछ रहे होते हैं कि ये हालात कब बदलेंगे?
दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा शरणार्थी संकट
  1. दुनियाभर में 7 करोड़ से ज्यादा शरणार्थियों में से 50 फीसद से ज्यादा लोग सीरिया, अफगानिस्तान और दक्षिण सूडान के हैं। 
  2. डराने वाली बात यह है कि इस समय दुनिया का शरणार्थी संकट काफी बड़ा हो गया है और यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा है। तमाम शरणार्थी यूरोप या ऐसे देशों में पहुंचना चाहते हैं, जहां उन्हें सुकून की जिंदगी जीने को मिले। 

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