रूस से बढ़ती भारत की नजदीकी से तिलमिलाए अमेरिका के रुख में आने वाले दिनों में कुछ नरमी आ सकती है। इसकी वजह भारत द्वारा उसके साथ की गई एक मेगा डिफेंस डील है। इसमें भारत यूएस से 30 सशस्त्र सी गार्जियन (या प्रीडेटर बी) ड्रोन खरीदेगा। हालांकि, इस डील के लिए भारत द्वारा रूस के साथ पहले किए गए एस-400 मिसाइल के सौदे पर कोई समझौता नहीं किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से डील न करने का दबाव बनाया था, लेकिन वह बेअसर रहा। सूत्रों के मुताबिक ये 10-10 ड्रोन तीनों सेनाओं के लिए खरीदे जाएंगे। इसे दूर से कंट्रोल किया जा सकेगा और समुद्र के साथ स्थल पर भी टारगेट को खत्म करने में कामयाब होंगे। इस सौदे को मंजूरी के लिए डिफेंस अक्विजिशन काउंसिल (DAC) को भेज दिया गया है।
 
 
क्या है  
  1. एक बार डीएसी से मंजूरी मिलने के बाद भारत अमेरिका को 'लेटर ऑफ रिक्वेस्ट' जारी कर देगा। इसके बाद डील पेंटागन के विदेश सैन्य विक्रय कार्यक्रम के अंतर्गत होगी। 
  2. एक सूत्र ने बताया कि इसमें एक साल का वक्त लग जाएगा। इससे पहले भारत ने 24 नेवल मल्टी रोल एमएच-60 रोमियो हेलिकॉप्टर्स की 2.6 अरब डॉलर की डील फाइनल की है। 
  3. सितंबर से अक्टूबर तक ये हेलिकॉप्टर भारत को मिल सकते हैं। इसके अलावा एक अरब डॉलर की अडवांस्ड सरफेस टु एयर मिसाइल सिस्टम का भी सौदा किया गया है।
  4. 2007 से लेकर अब तक भारत अमेरिका के साथ 17 अरब डॉलर की डिफेंस डील कर चुका है। इसके बावजूद रूस से एस-400 मिसाइल का सौदा करने पर अमेरिका दबाव बना रहा था। हालांकि भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि रूस से की जाने वाली यह डील कैंसल नहीं की जाएगी।
ड्रोन में क्या खास 
  1. लगभग फाइटर जेट की ही तरह ये ड्रोन दुश्मनों पर मिसाइल से वार करने में सक्षम होंगे। वे लंबी दूरी तक निरीक्षण करने और सुरक्षित तरीके से टारगेट पर वार करने में कामयाब रहेंगे। 
  2. नौसेना हिंद महासागर में फारस की खाड़ी से मलक्का स्ट्रेट तक निगरानी रखने में इनका इस्तेमाल कर सकती है। 
  3. ये ड्रोन भारत की समुद्री ताकत में इजाफा करने में काफी सहयोगी होंगे। इसमें अडवांस लेवल का जीपीएस इस्तेमाल होगा जो दुश्मन को बचकर निकलने नहीं देगा।

[printfriendly]