आज विश्व बुजुर्ग दुर्व्‍यवहार रोकथाम जागरूकता दिवस (World Elder Abuse Awareness Day) है। बुजुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्‍यवहार की रोकथाम के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से दुनिया भर में इसे 15 जून को मनाया जाता है। राष्ट्रीय राजधानी की गुलजार सड़कों से कुछ मील की दूरी पर स्थित एक छोटी-सी बस्ती में लगभग एक हजार पुराने नागरिकों का घर है, जिनके पास कोई और जगह नहीं है। ये वरिष्‍ठ नागरिक अपने शारीरिक और मानसिक शोषण की अनसुनी कहानियों के साथ रहते हैं, जो पीड़ा वो अपने बच्चे के कारण झेल रहे हैं।
 
क्या है 
  1. हेल्पएज इंडिया के 2018 के आंकड़ों के अनुसार, हमारे देश में 60 वर्ष से ऊपर की आबादी का हिस्सा 9.30 प्रतिशत है और भारत में चार बुजुर्गों में से एक का गलत व्‍यवहार होता है। दिल्ली से लेकर कोलकाता तक बुजुर्गों के रोने की आवाजें गूंजती हैं।
  2. ओल्‍ड एज होम में रहने वालीं एक 90 वर्षीय महिला चंपिया का कहना है, 'मैं जब एक बार बीमार पड़ गई थी, तब मेरे बेटे ने मेरे मुँह में जूता डालकर मुझे इतना पीटा था कि मैं अपने दाहिने कान से सुन नहीं पाती हूं।'
  3. चंपिया अम्मा का कहना है कि वह अपनी बेटी से बात करती हैं, लेकिन बेटे का कभी फोन नहीं आया। उनका कहना है कि उनकी बेटी यहाँ उनसे मिलने आएंगी और उन्हें पेंशन भी दिलवाएंगी। इतना सबकुछ होने के बाद भी चंपिया अम्मा अपने बेटे से मिलने कि उम्मीद रखती हैं।
  4. वैज्ञानिक नजरिये से देखें तो बुढ़ापा एक अनिवार्य शारीरिक आवस्था है, ऐसे में युवाओं को एक बात बड़ी गहराई से दिमाग में बिठा लेनी होगी कि उन्हें भी समय के इस चक्र के गुजरना होगा। 
  5. ऐसे में युवा पीढ़ी के सामने सामाजिक व्यवस्था को बरकरार रखने की बड़ी चुनौती है। युवाओं को बुजुर्गों की सेवा के संस्कार को बनाए रखना होगा। साथ ही आने वाली पीढ़ी को बताना होगा कि बुजुर्ग बोझ नहीं हैं। आदर, सम्मान और सेवा उनका अधिकार है, इससे उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता है। नई पीढ़ी को यह भी बताना होगा कि बुजुर्गों का तिरस्कार एक अपराध है।

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