आज (7 जून 2019)  विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस है। एक अनुमान के अनुसार उल्टे सीधे तरीके से खाने वाले खाद्य पदार्थों की वजह से पूरे देश में हर मिनट 44 लोग और प्रति साल 23 मिलियन से अधिक लोग दूषित भोजन खाने से बीमार पड़ रहे हैं। दूषित और जहरीला खाना खाने से हर साल लगभग 4700 लोग अपना जीवन खो देते हैं। ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं मगर सच हैं। एकबारगी तो कोई ये मान ही नहीं सकता है कि रोजाना 44 लोग दूषित खाना खाने की वजह से मर भी जाते हैं। दूषित खाना खाने के बाद रोजाना मरने वालों के ये आंकड़े डब्ल्यूएचओ यूरोपीय क्षेत्र में खाद्य जनित बीमारियों का बोझ नामक सर्वे के दौरान सामने आए हैं।
 
क्या है 
  1. दरअसल दूषित खाना खाने वालों और इससे होने वाले बीमारों के ये आंकड़े 7 जून 2019 को पहली बार विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर प्रस्तुत किए गए। डब्ल्यूएचओ यूरोपीय क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा में सुधार की कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए इस दिवस को मनाता है।
  2. दुनिया भर के हर देश में, छोटे से लेकर बड़े, अमीर से लेकर गरीब, खाद्य जनित बीमारियों से पीड़ित है। यूरोप भी इसका अपवाद नहीं है। संयुक्त राष्ट्र संघ की 1945 में खाद्य एवं कृषि संगठन के स्थापना दिवस 16 अक्टूबर के सम्मान में विश्वभर में प्रतिवर्ष मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम और अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष द्वारा भी इसे व्यापक रूप से मनाया जाता है।
  3. यूरोप के डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. ज़ुस्सजाना जैकब कहते हैं कि दुनिया भर में हर देश, छोटे से लेकर बड़े, अमीर से लेकर गरीब, खाद्य जनित बीमारियों से पीड़ित है। 
  4. खाद्य जनित बीमारियों का कौन शिकार हो सकता है इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस एक अभूतपूर्व अवसर है, जो सरकारों से उन प्रणालियों को मजबूत करने का आह्वान करता है जो सुरक्षित भोजन, पूरे यूरोप और दुनिया भर में गारंटी देते हैं।
  5. असुरक्षित भोजन लाखों लोगों को बीमार कर सकता है। कभी-कभी ये बीमारी गंभीरता का रूप ले लेती है और इससे मृत्यु भी हो सकती है। विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और रासायनिक खतरे न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए बल्कि अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए भी संभावित गंभीर परिणाम हैं। 
  6. अनुमानों के अनुसार, खाद्य जनित बीमारियों के सबसे लगातार कारण डायरिया रोग के कारक हैं। सबसे आम नोरोवायरस अनुमानित 15 मिलियन मामलों के साथ है, इसके बाद कैम्पिलोबैक्टर एसपीपी है, जो लगभग 5 मिलियन मामलों के लिए जिम्मेदार है।

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