2015 में दुनिया के 193 देशों ने 17 एसडीजी (टिकाऊ विकास लक्ष्य) क्षेत्र में लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए लक्ष्य रखा था कि 2030 तक इस सामाजिक बुराई को दूर करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देंगे। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दुनिया के देशों द्वारा किए जा रहे प्रयासों के आकलन पर 3 जून 2019 को जारी दुनिया का पहला एसडीजी जेंडर इंडेक्स बताता है कि कोई भी देश इस लक्ष्य के आसपास पहुंचता नहीं दिख रहा हैभारत इस सूचकांक में 56.2 अंकों के साथ 95वें पायदान पर है
 
क्या है 
  1. इन 193 देशों में महिलाएं और लड़कियों की संख्या 2.8 अरब हैइक्वल मीजर्स 2030 की भागीदारी से तैयार पहला एसडीजी जेंडर इंडेक्स बताता है कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं और लड़कियों का भाग्य अधर में लटका है। ये देश इनकी जीवनदशाओं को सुधारने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं।
  2. 2015 में इन्हें तय किया गया था। इसके तहत लैंगिक असमानता, गरीबी, जलवायु परिवर्तन सहित 17 चीजें शामिल थीं। तय किया गया था कि 2030 यानी 15 साल बाद इन क्षेत्रों के लिए तय किए गए लक्ष्यों को हासिल कर लिया जाएगा।
  3. 129 देशों की लैंगिक असमानता को खत्म करने के प्रयास को शून्य से सौ अंक दिए गए हैं। सूचकांक के अनुसार 90 या इससे ज्यादा अंक वाले देश की अच्छी प्रोग्रेस है जबकि 59 या इससे कम अंक वाले देशों की प्रगति चिंताजनक है।
  4. संसद में महिलाओं की अल्प भागीदारी, वेतनमान में अंतर और लैंगिक हिंसा के मामलों को दूर करने के लिए सभी देश संघर्ष करते दिख रहे हैं। सिर्फ 21 देशों के 80 या उससे अधिक अंक मिले हैं। 21 देशों को 50 से कम अंक मिले हैं। चाड सबसे निचले पायदान पर है

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