केरल में इन दिनों एक बार फिर वायरस निपाह (Nipah) अपने पैर पसार रहा है। हाल ही में केरल की स्वास्थ्य राज्य मंत्री केके शैलजा ने केरल में निपाह वायरस के पहले मामले की जानकारी दी है। एक 23 साल के युवक को निपाह वायरस से संक्रमित होने संदेह में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसकी पुष्टि पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) कि रिपोर्ट में हुई है। केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने भी राज्य के लोगों को सतर्क रहने और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा है।
 
यह निपाह वायरस है क्या?
  1. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक निपाह वायरस (NiV) तेजी से फैलता वायरस है, जो जानवरों और इंसानों दोनों में गंभीर बीमारी को पैदा करता है।
  2. इसका सबसे पहला मामला 1998 में मलेशिया के एक गांव 'सांगुई निपाह' में इस वायरस का पता चला था। और तभी से इसका नाम निपाह वायरस पड़ा।
  3. इस बीमारी के चपेट में आने की पहली घटना तब हुई जब मलेशिया के खेतों में सूअर, फ्रूट बैट (चमगादड़ की एक प्रजाति) के संपर्क में आए। उस वक़्त इस बीमारी के वाहक सूअर बनते थे। 
  4. लेकिन इसके बाद जहां-जहां NiV के बारे में पता चला, इस वायरस को लाने-ले जाने वाले कोई माध्यम नहीं थे। साल 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग इसकी चपेट में आए। दरअसल, इन लोगों ने खजूर के पेड़ से निकलने वाले तरल को चखा था और पेड़ तक इस वायरस को ले जाने वाली चमगादड़ थी। जिन्हें फ्रूट बैट कहा जाता है।

निपाह वायरस के लक्षण
  1. निपाह वायरस से संक्रमित व्यक्ति को आमतौर पर बुखार, सिरदर्द, उनींदापन, मानसिक भ्रम, कोमा, विचलन होता है। निपाह वायरस से प्रभावित लोगों को सांस लेने की दिक्कत होती है और साथ में जलन महसूस होती है। 
  2. वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत भी सकती है। इंसानों में निपाह वायरस एन्सेफलाइटिस से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से ब्रेन में सूजन आ जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ मामलों में 24-28 घंटे के अंदर लक्षण बढ़ने पर मरीज कोमा में भी चला जाता है।
  3. इंसानों में NiV इंफ़ेक्शन से सांस लेने से जुड़ी गंभीर बीमारी हो सकती है या फिर जानलेवा इंसेफ़्लाइटिस भी अपनी चपेट में ले सकता है। इंसानों या जानवरों को इस बीमारी को दूर करने के लिए अभी तक कोई इंजेक्शन नहीं बना है।

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