स्टार्ट-अप कंपनियों को फंड जुटाने में हो रही दिक्कतों के निदान के लिए सरकार ने आयकर कानून में ढील देने की तैयारी की है। इसके तहत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संव‌र्द्धन विभाग (डीपीआइआइटी) ने एक प्रस्ताव रखा है कि रिहाइशी संपत्तियों की बिक्री के अलावा किसी वित्त वर्ष के घाटे को उससे अगले वित्त वर्ष में समायोजित करने से जुड़े आयकर नियमों में ढील दी जा सकती है।
 
 
क्या है 
  1. ये सुझाव डीपीआइआइटी द्वारा तैयार 'स्टार्ट-अप विजन 2024' दस्तावेज का हिस्सा हैं। पूंजी जुटाने में मुश्किलों का सामना कर रही स्टार्ट-अप कंपनियों की दिक्कतें दूर करने के मकसद से डीपीआइआइटी ने नई सरकार के लिए यह विजन दस्तावेज तैयार किया है।
  2. डीपीआइआइटी ने आयकर कानून की धारा 54जीबी में ढील देने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत रिहाइशी संपत्तियों की बिक्री के चुनिंदा मामलों में कैपिटल गेन टैक्स से छूट दी जा सकती है। 
  3. डीपीआइआइटी ने आयकर कानून की धारा 79 में भी संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसके माध्यम से चुनिंदा कंपनियों के मामले में नुकसान को अगले वित्त वर्ष में समायोजित करने पर विचार किया जा सकता है।
  4. अधिकारियों के मुताबिक स्टार्ट-अप कंपनियों को नुकसान अगले वित्त वर्ष में समायोजित करने के लिए इस वक्त 100 फीसद हिस्सेदारी उनके ही पास रहने की शर्त है। इसे घटाकर 26 फीसद किया जा सकता है, ताकि स्टार्ट-अप कंपनियों को नए निवेशक मिलें।
फ़्लैशबैक
  1. स्टार्टअप एक इकाई है, जो भारत में पांच साल से अधिक से पंजीकृत नहीं है और जिसका सालाना कारोबार किसी भी वित्तीय वर्ष में 25 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है। 
  2. यह एक इकाई है जो प्रौद्योगिकी या बौद्धिक सम्पदा से प्रेरित नये उत्पादों या सेवाओं के नवाचार, विकास, प्रविस्तारण या व्यवसायीकरण की दिशा में काम करती है।
  3. इकाई पहले से अस्तित्व में व्यापार के विखंडन /पुनर्निर्माण द्वारा गठित नहीं की गई हो।
  4. इकाई एक स्टार्टअप के तौर पर नहीं मानी जाएगी यदि पिछले वित्तिय वर्ष में उसका कारोबार 25 करोड़ रुपये से अधिक हो या उसने गठन की तिथि से 5 वर्ष पूरा कर लिया हो।
  5. स्टार्टअप अंतर मंत्रालयी बोर्ड से प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद कर लाभ के लिए योग्य होगा

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