चीन का हाई-प्रोफाइल दूसरा बेल्ट ऐंड रोड फोरम 27 अप्रैल 2019 को खत्म हो गया। इस फोरम में 64 बिलियन डॉलर की सहयोग डील पर हस्ताक्षर हुए। पेइचिंग के ट्रिलियन डॉलर की कीमत वाले बीआरआई प्रॉजेक्ट के लिए संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की प्रतिज्ञा भी इस फोरम में ली गई। बता दें कि भारत की तरफ से की जा रही यह एक प्रमुख मांग रही है। बेल्ट ऐंड रोड फोरम में 37 देशोंकी सरकारें और प्रमुख शामिल हुईं। यह फोरम चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस ऐलान के बाद खत्म हुआ, जिसमें उन्होंने बेल्ट ऐंड रोड फोरम (BRF) बैठक में सीईओ कॉन्फ्रेंस के दौरान 64 बिलियन डॉलर की कीमत के समझौतों पर हस्ताक्षर होने की जानकारी दी।

क्या है  
  1. दुनिया के दूसरे नेताओं के साथ राउंड टेबल मीटिंग के बाद मीडिया को जारी एक बयान में शी ने कहा कि शुरुआती प्रक्रिया और बैठक की अवधि के दौरान कुल 283 प्रस्तावों के व्यवहारिक परिणाम हासिल हुए। 
  2. मीटिंग के आखिर में बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) कॉर्पोरेशन ने एक साझा बयान जारी किया। इसमें कहा गया था कि सभी को खुलेपन, पारदर्शिता, उदारता और समग्रता का सम्मान करना चाहिए।
  3. बयान में संप्रुभता के सम्मान का भी वादा किया गया। इसमें कहा गया है, 'हम एक दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हैं। यह हर राष्ट्र का अधिकार और प्राथमिक जिम्मेदारी है कि उसकी विकास रणनीतियां उसके राष्ट्रीय हितों और विधान के अनुसार हों।' 
  4. गौर करने वाली बात है कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का संदर्भ भारत द्वारा फोरम के बहिष्कार करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि भारत की यह मांग लंबे समय से रही है। 
  5. भारत ने 60 बिलियन यूएस डॉलर से ज्यादा वाले चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडॉर (CEPC) का विरोध किया था। यह कॉरिडोर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) से होकर बिछाया जा रहा है, जिस पर भारत ने आपत्ति जताई थी। चीन का कहना है कि यह एक इकनॉमिक प्रॉजेक्ट है और इससे संप्रभुता से जुड़े किसी भी मुद्दे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। 
  6. बयान में कुछ इकनॉमिक कॉरिडोर और अन्य परियोजनाओं का जिक्र किया गया है जो सम्पर्क सुविधाओं के विकास से प्रेरित और उस पर निर्भर हैं। 
  7. इनमें चीन-पाकिस्तान के अलावा नेपाल-चीन हिमालय-पारीय बहुआयामी संपर्क नेटवर्क, नेपाल चीन सीमा पारीय रेलवे नेटवर्क और चीन म्यांमा आर्थिक गलियारा परियोजना भी शामिल है। 
  8. इस बार फोरम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, नेपाल की राष्ट्रपति विद्याद देवी भंडारी, म्यांमा की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिस्टिन लेगार्ड तथा कई अन्य अफ्रीकी एवं एशियाई देशों के नेता शामिल हुए। 

Print Friendly, PDF & Email