भारत में पिछले 17 वर्षों में (2001 से 2018 तक) 16 लाख हेक्टेयर से अधिक जंगल खत्म हो चुके हैं। इससे यहां के वायुमंडल में लगभग 172 टन कार्बन का उत्सर्जन हुआ। जानी-मानी अंतरराष्ट्रीय शोध संस्था वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूआरआइ) द्वारा जारी गए एक अध्ययन के अनुसार इस अवधि के दौरान वनाच्छदित रकबे का कुल नुकसान गोवा के भौगोलिक आकार के चार गुना के बराबर है

क्या है 
  1. रिपोर्ट के मुताबिक, कुल वृक्षावरण के नुकसान का आधा हिस्सा पूर्वोत्तर के राज्यों नगालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालय और मणिपुर से है। 
  2. 2000 में वन आवरण भारत के भौगोलिक क्षेत्र का 12 फीसद था, जो 2010 में घटकर 8.9 फीसद हो गया। डब्ल्यूआरआइ इंडिया की निदेशक रुचिका सिंह के अनुसार, पूर्वोत्तर राज्यों में नुकसान के मुख्य कारणों में से एक जलवायु परिवर्तन है, जो सीधे जंगलों की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। 
  3. कम होते वनों का एक कारण निर्माण से जुड़ी परियोजनाएं भी हैं। जिनकी वजह से लगातार वनों को काटा या नष्ट किया जा रहा है।
  4. जिन राज्यों ने 2015 और 2017 के बीच अधिकतम वन खोए हैं, उनमें महाराष्ट्र्र, मध्य प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं
  5. स्टेट ऑफ द फॉरेस्ट रिपोर्ट ’के अनुसार, भारत में कुल वन आवरण देश के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 22 फीसद है, और यह 2001 -2018 के बीच धीरे-धीरे बढ़ा है। 
  6. एफएसआइ के पूर्व महानिदेशक सिब्बल दासगुप्ता ने कहा, पिछले दो सालों में भारत में वनावरण और वृक्षावरण में 1 फीसद की बढ़ोतरी हुई है

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