आरबीआई को आरटीआई एक्ट के तहत बैंकों का वार्षिक इंस्पेक्शन रिपोर्ट और लोन डिफॉल्टर की जानकारी उजागर करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई को निर्देश दिया है कि वह आरटीआई कानून के तहत बैंकों के वार्षिक इंस्पेक्शन रिपोर्ट व डिफाल्टर आदि से संबंधित जानकारी मुहैया कराए बशर्ते कि कानून के तहत उन्हें जानकारी न देने के लिए छूट मिली हो। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरबीआई के खिलाफ कंटेप्ट याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरबीआई राष्ट्रीय आर्थिक हित का रेफरेंस देकर आरटीआई के तहत बैंकों के सालाना इंस्पेक्शन रिपोर्ट आदि को उजागर करने से मना नहीं कर सकती जब तक कि कोई कानून उसे ऐसा करने की छूट न देता हो।
क्या है  
  1. सुप्रीम कोर्ट ने 30 दिसंबर 2016 को आरबीआई को निर्देश दिया था कि वह उस डिस्क्लोजर नीति को वापस करे जिसमें बैंकों की सालाना रिपोर्ट, लोन डिफॉल्टर आदि से संबंधित जानकारी उजागर न करने की बात कही थी। 
  2. आरबीआई का कहना था कि पॉलिसी और नियम के तहत इन जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इस पॉलिसी को लेकर नाराजगी जताई थी। अदालत ने कहा था कि 16 दिसंबर 2015 के आदेश का पालन नहीं किया गया इसमें आरटीआई के तहत आरबीआई को बैंकों व अन्य फाइनांशियल संस्थानों का सालाना रिपोर्ट पब्लिक करने को कहा गया था। 
  3. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरबीआई, बैंकों से संबंधित जानकारी आरटीआई के तहत सार्वजनिक करने के बारे में अपनी नीति को रिव्यू करे। अदालत ने कहा कि उसे आखिरी मौका दिया जाता है कि वह आरटीआई के कानून का पालन करे। 
  4. अदालत ने कहा कि अगर आरबीआई ने आरटीआई कानून का दायरे में जानकारी से मना किया तो फिर वह उसे गंभीरता से लेगा। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव की अगुवाई वाली बेंच ने आरबीआई से कहा है कि वह आरटीआई के तहत जानकारी देने की अपनी नीति को एग्जामिन करे। 
  5. अदालत ने कहा कि कानून के तहत आरबीआई जानकारी देने के लिए बाध्य है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरबीआई पर कंटेंप्ट कार्रवाई नहीं कर रहे हैं लेकिन उशे आखिरी मौका दिया जा रहा है कि वह आरटीआई कानून का पालन करे। सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से कहा है कि वह अगर अब आरटीआई के तहत जानकारी देने से मना करती है तो कोर्ट इसे गंभीरता से लेगी। 
  6. सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में आरबीआई को तब अवमानना नोटिस जारी किया था जब बैंकों के सालाना इंस्पेक्शन रिपोर्ट की जानकारी देते से मना किया गया था। 
  7. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरबीआई ट्रांसपैरेंसी कानून के तहत कोई भी जानकारी देने से मना नहीं कर सकती वह तब तक जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकती जब तक कि उसे कानून के तहत जानकारी देने से छूट न मिली हुई हो। 
  8. आरबीआई ने कहा था कि वह सालाना इंस्पेक्शन रिपोर्ट की जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकती। मामले में एक्टिविस्ट एससी अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरबीआई के खिलाफ कंटेप्ट याचिका दायर की थी। 

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