प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी की वायु गुणवत्ता सौंदर्यीकरण और आधारभूत संरचना के चलते बिगड़ती जा रही है। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की 15 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में इसे तीसरे स्थान पर रखा गया है। हालांकि विश्व के सबसे अधिक प्रदूषित शहर की बात करें तो कानपुर सूची में प्रथम स्थान पर है। यह दावा पर्यावरण के लिए काम करने वाली दिल्ली स्थित एक संस्था ने किया है।
 
क्या है 
  1. डब्ल्यूएचओ की इस सूची में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली छठे स्थान पर है। इसके लिए वायु प्रदूषण से निपटने में नाकामी के लिए यहां के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के आलस को जिम्मेदार बताया गया है। पॉलिटिकल लीडर्स पोजिशन एंड एक्शन एंड एयर क्वालिटी इन इंडिया 2014-19 में यह जानकारी दी गई है। इस रिपोर्ट को 'क्लाइमेट ट्रेंड्स' ने जारी किया है। इसमें कहा गया है, विश्व स्वास्थ्य संगठन की 15 शहरों की सूची में 14 शहर भारत के हैं। इनमें से चार उत्तर प्रदेश में है।
  2. हरियाणा का फरीदाबाद शहर प्रदूषित शहरों की सूची में दूसरे स्थान पर है। बिहार का गया और पटना क्रमश: चौथे और पांचवें स्थान पर है। वहीं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सातवें स्थान पर है। सूची में आगरा, मुजफ्फरपुर, श्रीनगर, गुरुग्राम, जयपुर, पटियाला और जोधपुर भी हैं।
  3. रिपोर्ट में कहा गया है कि वाराणसी में सांस की बीमारी और एलर्जी के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इसका कारण शहर में 'बड़े पैमाने' पर निर्माण कार्य बताया गया है। 
  4. प्रधानमंत्री ने 2014 का आम चुनाव यहां से जीता था । रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2017 में वाराणसी का वायु गुणवत्ता सूचकांक 490 तक पहुंच गया था, जो खतरनाक है। दिसंबर 2018 में यह 384 था जो बहुत खराब श्रेणी में आता है।