अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने कहा कि उसके आकलन के मुताबिक भारत के ऐंटी-सैटलाइट मिसाइल टेस्ट से अंतरिक्ष में जो मलबा तैयार हुआ है, वह आखिरकार वातावरण में ही जलकर नष्ट हो जाएगा। बता दें कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने भारत के 'मिशन शक्ति' पर चिंता जताते हुए, उसे 'भयानक' और उससे पैदा हुए मलबे को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए खतरा बताया था। 
 
क्या है 
  1. भारत ने 27 मार्च को धरती की निचली कक्षा में करीब 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर अपने एक लाइव सैटलाइट को ऐंटी-सैटलाइट मिसाइल से मार गिराने का सफल परीक्षण किया था। 
  2. इसके साथ ही भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा ऐसा देश बन गया, जिसके पास अंतरिक्ष में सैटलाइट को मार गिराने की क्षमता है। भारत ने इस परीक्षण को 'मिशन शक्ति' नाम दिया था। 
  3. भारत के ऐंटी-सैटलाइट मिसाइल परीक्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए NASA के प्रशासक जिम ब्राइडेंस्टाइन ने कहा था कि इससे अंतरिक्ष में 400 टुकड़ों में मलबा फैल गया है। उन्होंने कहा था, 'अभीतक करीब 60 टुकड़ों का ही पता चला है जिनमें से 24 अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।' 
  4. इससे पहले, 2007 में चीन ने ध्रुवीय कक्षा में एक सैटलाइट को नष्ट किया था जिससे अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा मलबा पैदा हुआ था। 3,000 से भी ज्यादा टुकड़े फैले थे। चूंकि, चीन ने 800 किलोमीटर की ऊंचाई पर सैटलाइट को गिराया था, इस वजह से ज्यादातर टुकड़े आज भी अंतरिक्ष में मौजूद हैं। 
  5. अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्हें लगता है कि भारत ने निचली कक्षा में परीक्षण के जरिए 2007 में चीन के परीक्षण जैसी स्थिति को टाल दिया है। भारत के भी शीर्ष रक्षा वैज्ञानिकों ने NASA की चिंताओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भारत के परीक्षण से अंतरिक्ष में पैदा हुआ मलबा 45 दिनों में नष्ट हो जाएगा। 
  6. भारत के 'मिशन शक्ति' पर अमेरिकी सरकार अपने सतर्क प्रतिक्रिया पर कायम है। अमेरिका के नैशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल के प्रवक्ता गैरेट मारक्विस ने कहा कि अमेरिका भारत के A-SAT टेस्ट के बाद से पैदा हुए मलबों पर नजर रखे हुए हैं। 
  7. अमेरिका सभी देशों के साथ मिलकर अंतरिक्ष में मलबों के खतरे को कम करने की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। मारक्विस ने कहा कि भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी के तहत अमेरिका अंतरिक्ष में दोनों देशों के साझा हितों को लेकर करीबी रिश्ते को प्रोत्साहित करता रहेगा। 

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