भारत-अमेरिका के बीच 27 मार्च 2019 को एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। ये समझौता भारत और अमेरिका के बीच अंतर-सरकारी एग्रीमेंट (Inter-Governmental Agreement) है। इसके बाद दोनों देशों के बीच कंट्री-बाइ-कंट्री (CbC) रिपोर्टों का आदान-प्रदान सुगम हो सकेगा। इसका सीधा लाभ देनों देशों में मौजूद बहुराष्ट्रीय कंपनियों को मिलेगा। इस समझौते के साथ द्विपक्षीय सक्षम प्राधिकरण की व्यवस्था भी भारत-अमेरिका के बीच लागू हो जाएगी। इसके बाद भारत और अमेरिका के बीच ऑटोमैटिक तरीके से सीबीसी रिपोर्ट का आदान-प्रदान आसान हो जाएगा। ये सीबीसी रिपोर्ट संबंधित कर क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मूल संस्थाओं द्वारा दायर की जाती हैं। ये समझौता एक जनवरी 2016 को या उसके बाद संबंधित न्यायालयों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की अंतिम मूल संस्थाओं द्वारा दायर सीबीसी रिपोर्टों पर लागू होगा।
 
क्या होती है सीबीसी रिपोर्ट
  1. ट्रांसफर प्राइसिंग डॉक्यूमेंटेशन और कंट्री-बाइ-कंट्री रिपोर्टिंग, बहुराष्ट्रीय उद्यमों (MNEs) को सालाना रिपोर्ट करने के लिए और प्रत्येक कर क्षेत्र के लिए एक खाका प्रदान करती है। 
  2. इसमें वे व्यापार की जानकारी साझा करते हैं। इसी रिपोर्ट को Country-by-Country (CbC) रिपोर्ट कहा जाता है।
  3. ट्रंप प्रशासन ने इससे पहले कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और सहयोग भी तेजी से बढ़ा रहा है। दोनों देशों के बीच अधिकारियों की यात्राएं बढ़ी हैं। 
  4. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के उपप्रवक्ता राबर्ट पलाडिनो ने संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि हमारी मजबूत सामरिक भागीदारी से दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। भारत, हिंद प्रशांत क्षेत्र में हमारे (अमेरिका के) प्रमुख सुरक्षा भागीदारों में से एक है।