सुप्रीम कोर्ट का DGP नियुक्ति पर फैसला आया हैं। कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में बदलाव करते हुए कहा है कि जिन अधिकारियों के रिटायरमेंट को कम से कम छह महीने का वक़्त बचा हो यूपीएससी उन्हीं को नियुक्ति पैनल में शामिल करने पर विचार करेगा। जिनकी सेवानिव्रति को छह महीने से कम वक़्त बचा है उनके नाम पर विचार नहीं होगा। बता दें कि डीजीपी का दो साल का निश्चित कार्यकाल होता है। राज्य सरकारें जिन अधिकारियों की सेवानिव्रति होने वाली होती थी उन्हें डीजीपी नियुक्त कर देती थी और उन्हें दो साल का निश्चित कार्यकाल मिल जाता था
 
क्या है 
  1. गौरतलब है कि साल 2006 में पुलिस सुधार पर दिए गए आदेश को लागू न करने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। 
  2. सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की याचिका पर 2006 में पुलिस सुधार को लेकर आदेश दिए थे। 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि डीजीपी का कार्यकाल कम से कम दो साल होगा। 
  3. अवमानना याचिका में आरोप है कि साल 2006 में पुलिस सुधार पर दिए गए अदालत के आदेश को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक लागू नहीं किया.याचिका में इन राज्यों पर अवमानना की कार्यवाही चलाने की मांग की गई है।
  4. वही पहले भी सुप्रीम कोर्ट, केंद्र और सभी राज्यों को एक्टिंग डीजीपी नियुक्त नहीं करने के लिए आदेश दे चुका है। कोर्ट ने कहा था कि ये कदम उठाना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। 
  5. पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य सरकारें डीजीपी या पुलिस कमिश्नर पद पर आसीन अधिकारी के रिटायरमेंट से तीन महीने पहले दावेदार पुलिस अधिकारियों के नाम यूपीएससी के पास भेजें।
  6. इन नामों में से तीन सबसे उपयुक्त अधिकारियों की लिस्ट यूपीएससी बनाएगी और इन नामों में से किसी भी एक को डीजीपी चुनने के लिए राज्य सरकार स्वतंत्र रहेगी। कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति के लिए अगर राज्य सरकार का अलग से कोई कानून है तो उस पर रोक होगी।