भाभा परमाणु अनुसंधान केन्‍द्र (बीएआरसी) के भौतिकी समूह के विख्‍यात वैज्ञानिक और निदेशक तथा साह इंस्‍टीट्यूट ऑफ न्‍यूक्लियर फि‍जिक्‍स, कोलकाता के निदेशक डॉ. ए. के. मोहंती ने बीएआरसी के निदेशक का पदभार संभाल लियाडॉ. मोहंती ने परमाणु ऊर्जा विभाग के अध्‍यक्ष और सचिव श्री के. एन. व्‍यास के स्‍थान पर यह पद संभाला है। डॉ. मोहंती ने बीएआरसी प्रशिक्षण स्‍कूल के 26वें बैच से स्‍नातक किया और 1983 में भाभा परमाणु अनुसंधान केन्‍द्र के परमाणु भौतिकी डिवीजन में शामिल हो गए। पिछले 36 वर्षों के दौरान डॉ. मोहंती ने परमाणु भौतिकी के अनेक क्षेत्रों में कार्य किया।
 
क्या है 
  1. डॉ. मोहंती को 1988 में भारतीय भौतिकी सोसायटी का युवा वैज्ञानिक पुरस्‍कार, 1991 में भारतीय राष्‍ट्रीय विज्ञान अकादमी द्वारा युवा भौतिक शास्‍त्री पुरस्‍कार और 2001 में होमी भाभा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के परमाणु ऊर्जा विभाग से पुरस्‍कार मिल चुका है।
  2. बीएआरसी के निदेशक का पद भार संभालते हुए, डॉ. मोहंती ने भौतिकी समूह में अपने पूर्व अधिकारियों के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया। जिन्‍होंने परमाणु भौतिकी के क्षेत्र में निम्‍न और उच्‍च ऊर्जा की बारीकियों को समझाने में मदद की। 
  3. उन्‍होंने अपने वरिष्‍ठ सहयोगियों के प्रयासों के प्रति भी आभार व्‍यक्‍त किया जिन्‍होंने राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय महत्‍व की परियोजनाओं को पूरा करने में मदद की जिनमें उन्‍होंने अपना योगदान दिया। उन्‍होंने कहा कि सामाजिक महत्‍व के क्षेत्र में वे बीएआरसी के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।  
फ़्लैशबैक
  1. भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र मुम्बई में स्थित है। यह भारत सरकार के परमाणु उर्जा विभाग के अन्तर्गत नाभिकिय विज्ञान एवं अभियांत्रिकी एवं अन्य संबन्धित क्षेत्रों का बहु-विषयी नाभीकीय अनुसंधान केन्द्र है।
  2. भारत का परमाणु कार्यक्रम डा॰ होमी जहांगीर भाभा के नेतृत्व में आरम्भ हुआ। ३ जनवरी सन् १९५३ को परमाणु उर्जा आयोग के द्वारा परमाणु उर्जा संस्थान (ए ई ई टी) के नाम से आरम्भ हुआ और तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा २० जनवरी सन् १९५७ को राष्ट्र को समर्पित किया गया। 
  3. इसके बाद परमाणु उर्जा संस्थान को पुनर्निर्मित कर १२ जनवरी सन् १९६७ को इसका नया नाम भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र किया गया, जो कि २४ जनवरी सन् १९६६ में डा॰ भाभा की विमान दुर्घटना में आकस्मिक मृत्यु के लिये एक विनम्र श्रद्धांजलि थी।