गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को विदेश से मिलने वाले चंदे में पिछले चार वर्षो में 40 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। विदेशी परामर्शदाता फर्म बेन एंड कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, नरेंद्र मोदी सरकार में गृह मंत्रलय ने 13 हजार से अधिक एनजीओ के लाइसेंस रद किए। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘विदेशी चंदे में करीब 40 फीसद कमी आई है। विदेशी चंदे को अधिनियमित करने वाले एफसीआरए के उल्लंघन पर सरकार द्वारा एनजीओ पर की गई कार्रवाई के कारण ऐसा हुआ।
 
क्या है 
  1. कई संगठनों ने सरकारी कार्रवाई का विरोध किया और इसे कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया। मोदी सरकार ने पिछले साल रिजर्व बैंक के बोर्ड के सदस्य नचिकेत मोर का कार्यकाल कम कर दिया था। मोर भारत में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के निदेशक हैं।
  2. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने मोर को हटाने के लिए अभियान चलाया था। 
  3. फोर्ड फाउंडेशन और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे बड़े विदेशी एनजीओ को भी सरकार की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस दौरान समाजसेवियों का निजी योगदान बढ़ा है। 
फ़्लैशबैक
  1. गैर सरकारी संगठन (NGO) एक ऐसा शब्द है जो बिना किसी सरकारी भागीदारी या प्रतिनिधित्व के साथ प्राकृतिक या कानूनी व्यक्तियों के द्वारा बनाए गए विधिवत संगठित गैर सरकारी संगठनों को संदर्भित करने के लिए व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है। 
  2. उन मामले में जिनमें गैर सरकारी संगठन पूरी तरह से या आंशिक रूप से सरकारों द्वारा निधिबद्ध होते हैं, NGO अपना गैर-सरकारी ओहदा बनाए रखता है और सरकारी प्रतिनिधिओं को संगठन में सदस्यता से बाहर रखता है। 
  3. शब्द इंटरगवर्नमेंटल ओर्गेनाइज़ेशन के विपरीत, "गैर सरकारी संगठन" एक आम उपयोग का शब्द है, लेकिन एक कानूनी परिभाषा नहीं है। कई न्यायालयों में इस प्रकार के संगठनों को "नागरिक समाज संगठन" के रूप में परिभाषित किया जाता है या अन्य नामों से निर्दिष्ट किया जाता है।
  4. अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय गैर सरकारी संगठनों की संख्या 40,000 है। राष्ट्रीय संख्या और भी अधिक है: रूस में 277,000 गैर सरकारी संगठन हैं। भारत में 1 मिलियन और 2 मिलियन के बीच गैर सरकारी संगठन होने का अनुमान है।