अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने भारतीय वायु सेना को चार चिनूक सैन्य हेलिकॉप्टर सौंप दिए हैं। ये हेलिकॉप्टर गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर उतारे गए। कंपनी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि सीएच47एफ(1) चिनूक हेलिकॉप्टरों को चंडीगढ़ ले जाया जाएगा, जहां साल के आखिर तक उन्हें औपचारिक रूप से भारतीय वायु सेना में शामिल कर लिया जाएगा। चिनूक बहुपयोगी हेलिकॉप्टर है। वह बहुत ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है। चिनूक हेलिकॉप्टर को भारी भरकम सामान ले जाने के लिए जाना जाता है। सैनिकों, हथियार, ईंधन और उपकरण ले जाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। बयान में कहा गया है कि चिनूक के बेड़े में शामिल होने से भारतीय वायु सेना को बहुत मजबूती मिलेगी। वायु सेना बोइंग से 15 हेलिकॉप्टर खरीद रही है, जिसमें से चार हेलिकॉपटरों की पहली खेप वायु सेना को मिली है।
 
क्या है 
  1. भारतीय वायु सेना ने सितंबर, 2015 में बोइंग को 15 चिनूक हेलिकॉप्टर के साथ ही 22 अपाचे हेलिकॉप्टर का ऑर्डर दिया था। बोइंग ने हेलिकॉप्टर का ढांचा तैयार करने के लिए भारत में संयुक्त उद्यम लगाने के साथ ही सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए 160 कंपनियों को जोड़ा है।
  2. चिनूक हेलीकॉप्टर अपनी हेवी लिफ्ट की ताकत के जाने जाते हैं। पहली बार इन हेलीकॉप्टर्स ने 1962 में उड़ान भरी थी। जिसके बाद से इन्हें कई बार अपडेट किया जा चुका है। 
  3. अब स्थिति ये है कि चिनूक हेलीकॉप्टर दुनिया के सबसे आधुनिक हेवीलिफ्ट चॉपर माने जाते हैं। भारत के नजरिए से देखें तो सीमावर्ती इलाकों में सड़क निर्माण की दृष्टि से चिनूक हेलीकॉप्टर्स काफी अहम है। चिनूक हेलीकॉप्टर्स की मदद से सीमावर्ती इलाकों में सड़क निर्माण की सामाग्री आसानी से पहुंचायी जा सकती है, जिससे भारतीय सीमाओं पर ढांचागत विकास में तेजी आएगी।
  4. वहीं दूसरी तरफ अपाचे हेलीकॉप्टर की बात करें तो यह हेलीकॉप्टर दुनिया के सबसे विध्वंसक हेलीकॉप्टर माने जाते हैं। इन हेलीकॉप्टर्स का निर्माण 1984 में किया गया था, जिसके बाद से इसे कई बार अपडेट किया जा चुका है। 
  5. भारतीय वायुसेना के नजरिए से देखें तो टेक्टिकल लड़ाई के समय में यह काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। भारत के पड़ोसी चीन और पाकिस्तान की तरफ से जिस तरह से चिंताएं उभर रही हैं, ऐसे में चिनूक और अपाचे हेलीकॉप्टर्स भारतीय वायुसेना के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं।

Print Friendly, PDF & Email