भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) फ्रेंच गुएना के अंतरिक्ष केंद्र से अपने 40वें संचार उपग्रह जीसैट-31 को प्रक्षेपित कर दिया। इसरो के मुताबिक उपग्रह की आयु 15 साल की है। यह कक्षा के अंदर मौजूद कुछ उपग्रहों पर संचालन संबंधी सेवाओं को जारी रखने में मदद मुहैया करेगा और जियोस्टेशनरी कक्षा में केयू-बैंड ट्रांसपोंडर की क्षमता बढ़ायेगा। इसरो ने एक बयान में बताया है कि 2,535 किलोग्राम वजनी उपग्रह को फ्रेंच गुएना के कुरू से रॉकेट एरिएन-5 (वीए247) के माध्यम से प्रक्षेपित किया गया। अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक, उपग्रह जीसैट-31' को इसरो के परिष्कृत आइ-2के बस पर स्थापित किया गया है। यह इसरो के पूर्ववर्ती इनसैट/जीसैट उपग्रह श्रेणी के उपग्रहों का उन्नत रूप है। यह उपग्रह भारतीय भू-भाग और द्वीप को कवरेज प्रदान करेगा।
 
जीसैट-31 से होगा ये फायदा
  1. जीसैट-31 लांच होने से वीसैट नेटवर्क, टेलीविजन अपलिंक्स, डिजिटल उपग्रह समाचार जुटाने, डीटीएच टेलीविजन सेवाओं और सेलुलर बैक हॉल संपर्क में फायदा होगा। 
  2. इससे एटीएम का नेटवर्क पहले की अपेक्षा काफी अच्छा हो जाएगा। 
  3. यह उपग्रह अपने व्यापक बैंड ट्रांसपोंडर की मदद से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के विशाल समुद्री क्षेत्र के ऊपर संचार की सुविधा के लिये विस्तृत बीम कवरेज प्रदान करेगा।
  4. यह कक्षा के अंदर मौजूद कुछ उपग्रहों पर संचालन संबंधी सेवाओं को जारी रखने में मदद मुहैया करेगा और जियोस्टेशनरी कक्षा में केयू-बैंड ट्रांसपोंडर की क्षमता बढ़ायेगा। 
  5. इससे टेलीफोन और इंटरनेट सेवाएं और बेहतर होंगी। 
  6. इस उपग्रह के लांच होने से दक्षिण अफ्रीका और यूरोप के लोगों को भी लाभ होगा। 
  7. यह 15 वर्षों तक अंतरिक्ष में आसानी से काम कर सकेगा

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