प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और फिनलैंड के बीच हुए समझौता ज्ञापन को अपनी मंजूरी दी है। यह समझौता ज्ञापन महत्वाकांक्षी उद्योग-जन्य नवाचार और अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं को अनुसंधान विकास और नवाचार के व्यापक कार्य क्षेत्र में लागू करने और वित्त पोषण के लिए जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी हितों के आधार पर सहयोग करने के लिए किया गया है।
 
क्या है 
  1. यह समझौता ज्ञापन दीर्घकालीन अनुसंधान, विकास और नवाचार सहयोग करने तथा भारतीय और फिनलैंड के संगठनो के मध्य सहयोग नेटवर्क को स्थापित और मजबूत बनाने में सहायता प्रदान करेगा।
  2. उच्च अंतर्राष्ट्रीय मानकों की जरूरत आधारित महत्वाकांक्षी संयुक्त परियोजनाओं के वित्त पोषण द्वारा दोनों देशों का उद्देश्य विश्व श्रेणी के नवाचारी लाभों को दोनों देशों तक पहुंचाने में सहायता करना है। इससे दोनों देशों के वैज्ञानिकों, अनुसंधानकर्ताओं और उद्योग के मध्य ज्ञान को साझा करना और ज्ञान का सृजन करने में मदद मिलेगी।
  3. नवाचार की सहयोग के केन्द्र बिन्दु के रूप में पहचान करने के लिए डीबीटी और बिजनेस फिनलैंड भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) के साथ महत्वाकांक्षी उद्योग-जन्य नवाचारी और अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं के वित्त पोषण और कार्यान्वयन के लिए सहयोग करने पर सहमत हुए हैं। 
आपसी हितों के आधार पर निम्नलिखित अनुसंधान क्षेत्रों की पहचान की गई है-
  1. मिशन नवाचार; बायोफ्यूचर मंच; जैव ईंधन; जैव ऊर्जा; बायोमास आधारित उत्पाद;
  2. जैव प्रौद्योगिकी के पर्यावरणीय और ऊर्जा अनुप्रयोग;
  3. स्टार्ट-अप और प्रगतिशील कम्पनियों का व्यापार विकास;
  4. जीव विज्ञान में शिक्षा प्रौद्योगिकियां और खेल;
  5. जीव विज्ञान उद्योग के अन्य क्षेत्र।
पृष्ठभूमि
  1. इस समझौता ज्ञापन पर फिनलैंड गणराज्य की सरकार और भारत सरकार के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग के बारे में हुए अनुबंध के अनुसार हस्ताक्षर किए गए थे। 
  2. समझौता ज्ञापन पर 25 मार्च, 2008 को हेलसिंकी में हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें आपसी हितों के आधार पर फिनलैंड और भारतीय संगठनों के बीच दीर्घकालीन अनुसंधान और विकास तथा नवाचार (आईएंडडीएंडआई) सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति दी गई थी।

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