बढ़ते प्रदूषण की चुनौतियों से निपटने की मुहिम में केंद्र सरकार ने राज्यों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। इसके तहत उन्हें सभी जिलों और नगरीय क्षेत्रों में इससे निपटने के लिए हाईपावर कमेटी गठित करने को कहा है। साथ ही प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कड़े कदम भी उठाने को कहा है। अभी प्रदूषण से निपटने के लिए ऐसी कमेटी सिर्फ केंद्र और राज्य स्तर पर ही मौजूद है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक प्रदूषण का स्तर जिस तरीके से देश के सभी शहरों में तेजी से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके तहत जिला स्तर पर जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) की अध्यक्षता में यह कमेटी गठित होगी, जबकि नगरीय क्षेत्रों में निगमायुक्त की देखरेख में यह कमेटी काम करेगी। मौजूदा समय में केंद्र स्तर पर पर्यावरण मंत्रालय के सचिव और राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ऐसी कमेटी गठित है।
 
क्या है 
  1. राज्यों को दिए गए निर्देश में मंत्रालय का निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने को लेकर पूरा जोर है। इसके तहत हवा की गुणवत्ता को जांचने के लिए सभी जिलों और शहरों में ज्यादा से ज्यादा उपकरण लगाने को कहा गया है,ताकि प्रदूषण के बढ़ते स्तर की सटीक जानकारी मिल सके।
  2. मंत्रालय की मानना है कि जब तक प्रदूषण के बढ़ते स्तर और कारणों की जानकारी नहीं होगी, तब तक उपाय करना मुश्किल है। मौजूदा समय में देश के करीब दो सौ जिलों में ही हवा की गुणवत्ता को जांचने की सटीक व्यवस्था उपलब्ध है।
  3. मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबकि जिलों और नगरीय क्षेत्रों में ऐसी कमेटियों के गठन के बाद हर महीने उनके कामों की समीक्षा भी होगी। फिलहाल यह काम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की देखरेख में होगा। 
  4. खासबात यह है कि जिला स्तर पर गठित होने वाली हाईपावर कमेटी में जिला स्तर पर तैनात प्रदूषण बोर्ड का अधिकारी भी शामिल होगा। मौजूदा समय में इसका काम सिर्फ कागजों तक ही सिमटा हुआ है।

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