सरकार मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों और कारोबारियों की तरह सर्विस सेक्टर में भी छोटे उद्यमियों को जीएसटी की कंपोजीशन स्कीम की सुविधा देने जा रही है। जीएसटी काउंसिल की 31वीं बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई। सर्विस सेक्टर के लिए कंपोजीशन की सीमा कितनी होगी, इस बारे में काउंसिल ने निर्णय का औपचारिक एलान नहीं किया है। लेकिन कहा जा रहा है कि यह 50 लाख रुपये हो सकती है। साथ ही इस क्षेत्र के लिए जीएसटी की दर पांच फीसद की जा सकती है। फिलहाल कंपोजीशन स्कीम के लिए सालाना टर्नओवर की सीमा एक करोड़ रुपये है और जीएसटी कानून में संशोधनों के प्रभावी होने के बाद इसे बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये किया जा सकता है। लगभग 18 लाख कारेाबारियों ने इसके तहत पंजीकरण कराया हुआ है। सेवा क्षेत्र के उद्यमियों को फिलहाल यह सुविधा नहीं मिल रही है
 
क्या है 
  1. कंपोजीशन स्कीम छोटे कारोबारियों के लिए काफी बेहतर है क्योंकि इसे लेने पर उनके लिए जीएसटी का अनुपालन सरल हो जाता है। उन्हें तीन महीने में मात्र एक रिटर्न दाखिल करना होता है।
  2. सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए 3.3 फीसद के निर्धारित राजकोषीय घाटा लक्ष्य से नहीं भटकेगी। जीएसटी काउंसिल की 31वीं बैठक के बाद जेटली ने कहा कि दरों में कटौती से राजस्व नुकसान के बावजूद सरकार चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर टिकी रहेगी। 
  3. वित्त मंत्री ने कहा, ‘इस वक्त जब हम राजस्व लक्ष्य की ओर देखते हैं तो पता चलता है कि इंडायरेक्ट टैक्स वसूली अपने लक्ष्य से थोड़ा पीछे है, जबकि डायरेक्ट टैक्स वसूली लक्ष्य से थोड़ा आगे है। हमारा गैर-कर राजस्व भी उम्मीद के अनुरूप ही बढ़ रहा है।
  4. वर्तमान हालात में सरकार को पूरी उम्मीद है कि हम राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर टिके रहेंगे।’ गौरतलब है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल ने लगभग दो दर्जन वस्तुओं पर टैक्स की दर घटा दी है। इनके तहत टीवी, टायर और सिनेमा टिकट समेत आम उपयोग की कई चीजें पहली जनवरी से सस्ती हो जाएंगी। समीक्षा के बाद जीएसटी के सबसे ऊंचे 28 फीसद वाले स्लैब में अब महज 28 वस्तु और सेवा रह गए हैं। हालांकि उद्योग जगत ने जीएसटी काउंसिल के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि सीमेंट को 28 फीसद वाले स्लैब से निकालने की जरूरत है। 

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