केंद्र सरकार ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में दंडात्मक प्रावधानों को सख्त बनाने का फैसला किया है। बच्चों से जुड़ी पोर्नोग्राफी के व्यावसायिक इस्तेमाल के मामले में पहले तय तीन साल की सजा को बढ़ाकर पांच साल से लेकर अधिकतम सात साल तक कर दिया गया है। इस संबंध में अपराध को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर विभिन्न तरह के अपराधों में सजा का दायरा बढ़ा दिया है। एक ही अपराध को दूसरी बार अंजाम देने पर सजा का दायरा बढ़ जाएगा। महिला व बाल विकास मंत्रालय की ओर से पॉक्सो ऐक्ट में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद कानून मंत्रालय ने इस पर अपनी मुहर लगा दी है। इसे अब आखिरी मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जा सकता है।
 
क्या है 
  1. प्रस्तावित संशोधन के मुताबिक, अपराध को तीन श्रेणियों में बांटते हुए कानून की धारा 15-एक के तहत प्रावधान किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ी सामग्री किसी भी रूप में अपने पास रखता है और उसे नष्ट नहीं करता या संबंधित प्राधिकार को रिपोर्ट नहीं करता तो उस पर पहली बार अपराध की स्थिति में एक हजार रुपये और दोबारा अपराध करने पर पांच हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
  2. दूसरी श्रेणी के तहत, कानून की धारा 15-दो के तहत अगर इस तरह की सामग्री का प्रचार किया जाता है, सामग्री किसी भी रूप में वितरित की जाती है तो तीन साल तक की सजा और जुर्माना दोनों हो सकता है। बशर्ते इस सामग्री का उपयोग रिपोर्ट करने या कोर्ट में सबूत के तौर पर न किया जा रहा हो।
  3. तीसरी श्रेणी के तहत, अपराध को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति पोर्नोग्राफी सामग्री जिनमें किसी भी रूप में बच्चे शामिल हों, अपने पास रखता है और इसका व्यावसायिक उपयोग करता है तो पहली बार अपराध की स्थिति में उसे तीन साल तक की सजा हो सकती है। 
  4. इसे पांच साल सजा तक बढ़ाया जा सकता है। दूसरी बार अपराध साबित होने पर पांच साल तक की सजा हो सकती है जिसे सात साल की अवधि तक बढ़ाया जा सकता है। गौरतलब है कि पहले कानून में अपराध का वर्गीकरण ठीक से नहीं किया गया था और सजा का प्रावधान भी कम था।

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