भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) की सफलता गाथा में एक और अध्याय जुड़ गया है। 14 नवम्बर 2018 को इसरो ने बाहुबली कहे जाने वाले अपने सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-एमके3-डी2 की मदद से देश के सबसे भारी और उन्नत संचार उपग्रह जीसैट-29 को कक्षा में स्थापित किया। यह उपग्रह पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ इलाकों में इंटरनेट व अन्य संचार सुविधाएं मुहैया कराने में मददगार होगा। इसरो के वैज्ञानिकों ने इस अभियान को इसलिए भी अहम माना है क्योंकि भारत के महत्वाकांक्षी चंद्रयान-2 और मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियानों में इस रॉकेट का इस्तेमाल किया जा सकता है। जनवरी 2019 में भेजा जाने वाला चंद्रयान इस रॉकेट का पहला ऑपरेशनल अभियान होगा।
 
जीसैट-29 सैटेलाइट पर एक नजर
  1. 3,423 किलोग्राम वजन के साथ यह भारत का सबसे भारी सैटेलाइट है
  2. यह पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट व संचार सुविधाएं पहुंचाने में मददगार होगा
  3. वैज्ञानिकों ने इसे केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया पहल के लिए अहम बताया है
  4. 10 साल के मिशन पर भेजे गए इस सैटेलाइट की सफलता से नई टेक्नोलॉजी का रास्ता खुलेगा
  5. इसके जरिये इसरो पहली बार लेजर आधारित ऑप्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम का परीक्षण कर रहा है
बाहुबली का बल
  1. जीएसएलवी-एमके3 इसरो द्वारा तैयार सबसे भारी रॉकेट है
  2. 43.4 मीटर ऊंचे इस रॉकेट का वजन करीब 640 टन है
  3. यह 4,000 किलो तक का पेलोड लेकर जाने में सक्षम है
  4. इसी तरह के रॉकेट से पांच जून 2017 को जीसैट-19 सैटेलाइट भेजा गया था

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