इंटरनेट की बदलती दुनिया में भारत तेजी से पांव पसार रहा है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में पचास करोड़ से अधिक इंटरनेट यूजर हैं। मौजूदा दौर की बात करें तो आज देश में 480 मिलियन से अधिक स्मार्टफोन यूजर्स हैं। इसकी वजह से कहा सकता है कि आज हर हाथ में स्‍मार्ट फोन के रूप में इंटरनेट मुहैया है। लेकिन यही इंटरनेट इस वर्ष कई जगहों पर परेशानी का सबब बना रहा है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि भारत में 18 से 36 आयु वर्ग के लोग 35 प्रतिशत, जबकि 37 साल से ज्यादा आयुवर्ग वाले लोग 13 प्रतिशत इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं।
 
क्या है 
  1. इंटरनेट के फैलते मायाजाल का यह एक दूसरा रूप है जिसमें यह कई बार घातक साबित हुआ है। इंटरनेटशटडाउनट्रेकर के ‘फ्रीडम ऑन द नेट 2018’ के मुताबिक इस वर्ष अब तक करीब 121 बार विभिन्‍न जगहों पर इंटरनेट को बंद किया गया। वहीं पिछले वर्ष यह आंकड़ा 79 पर था। 
  2. दिल्‍ली बेस्‍ड सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर के शोध में यह बात सामने आई है कि वर्ष 2012 से लेकर अब तक जिस राज्‍य में सबसे अधिक बार इंटरनेट को बंद किया गया उसमें सबसे ऊपर जम्‍मू कश्‍मीर रहा है। इसके बाद दूसरे नंबर पर राजस्‍थान रहा है
  3. सबसे कम तेलंगाना, तमिलनाडु, झारखंड, असम, चंडीगढ़ में सबसे कम बार महज एक बार इंटरनेट की सेवा को विभिन्‍न कारणों से रोकना पड़ा था। 
  4. कुल मिलाकर भारत में 2012 से 2018 तक में करीब 12615 घंटे इंटरनेट बंद रहा। इसकी वजह से 16590 करोड़ रुपये का भी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं इस दौरान करीब चार हजार घंटे के लिए फिक्‍स्‍ड लाइन इंटरनेट को भी बंद किया गया जिससे करीब 4746 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।
दूसरे देशों पर भी एक नजर 
  1. दुनिया के दूसरे देशों की बात करें तो आइसलैंड, इस्‍तोनिया में महज छह बार और कनाडा में करीब 15 बार इंटरनेट को बंद करना पड़ा। 
  2. चीन, ईरान और सीरिया में इस दौरान करीब 88, 85 और 83 बार इंटरनेट बंद करना पड़ा। आपको यहां पर ये भी बता दें कि पिछले माह अक्‍टूबर में ही मीडिया में इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि करीब दो दिनों तक दुनिया इंटरनेट की सुविधा से महरूम रहेगी। इसकी वजह मुख्य डोमेन सर्वर्स के कुछ घंटों तक रुटीन मेंटनेंस पर थी।
  3. जहां तक भारत की बात करें तो हम मोबाइल इंटरनेट डाउनलोड स्पीड के मामले में भारत को विश्व भर में 109वां स्थान है। इस वर्ष जून में आई ऊक्ला की रिपोर्ट के मुताबिक इस रैंकिंग में नॉर्वे 62.07 एमबीपीएस की औसत स्पीड के साथ पहले स्थान पर है। हालांकि ब्रॉडबैंड के मामले में हम पिछले वर्ष के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। अब भारत 76वें के स्थान 67वें स्थान पर है

 

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