भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने महाराष्ट्र के जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग के सहयोग से स्थायी स्वच्छता को लेकर क्षेत्रीय समीक्षा बैठकों की श्रंखला में पहली ऐसी बैठक का आयोजन किया। ये क्षेत्रीय समीक्षा नागपुर में आयोजित की गई जिसमें ग्रामीण स्वच्छता का जिम्मा संभालने वाले राज्य सचिवों, मिशन निदेशकों और अन्य राज्य स्वच्छ भारत मिशन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इनके अलावा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात के 25 जिलों के प्रतिनिधि भी इसमें मौजूद थे
 
क्या है 
  1. स्वच्छ भारत मिशन के कार्यान्वयन तंत्र में गुणवत्ता और स्थिरता दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया गया है, खासकर अब जब देश भर में ज्यादातर जिले खुले में शौच से मुक्त होने का स्तर पा चुके हैं। 
  2. इस समीक्षा बैठक का लक्ष्य स्थायित्व पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करके काम करने और जमीनी स्तर पर हुए काम की गुणवत्ता को सुधारने पर था। गुणवत्ता पहलों के लिए संचार सुधारने और बुनियादी ढांचे व आंकड़ों को बेहतर करने के लिए इस बैठक में गुणवत्ता और स्थायित्व के संकेतकों की श्रंखला का दायरा छुआ गया। 
  3. राज्यों ने भी अपने यहां के जियोटैगिंग, ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्ति) सत्यापनों, सूचना, शिक्षा व संचार गतिविधियों जैसे स्थिरता संकेतकों के स्तर को प्रस्तुतियों के माध्यम से दिखाया जिसके बाद ये चर्चा हुई कि आगे कैसे बढ़ा जाए। 
  4. अपनी अंतिम टिप्पणी में श्री परमेश्वरन अय्यर ने राज्यों द्वारा अब तक किए गए प्रयासों की तारीफ की और कहा कि भारत के स्वच्छ और स्वस्थ भविष्य को सुरक्षित करने में गुणवत्ता और स्थायित्व पर ध्यान केंद्रित करने से ही मदद मिलेगी।
  5. यह क्षेत्रीय बैठक 24 अक्टूबर को नई दिल्ली में आधिकारिक रूप से शुरू हुई कार्यशाला के बाद हुई है। उस कार्यशाला में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने गुणवत्ता व स्थिरता मिशन के कई संदेशों की समीक्षा और संचार के लिए राज्य स्वच्छ भारत मिशन अधिकारियों से मुलाकात की। 
  6. देश भर में होने जा रही क्षेत्रीय स्थायी स्वच्छता कार्यशालाओं की श्रंखला के लिए अगला एक महीना तय किया गया है जिसमें सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का दायरा पूरा किया जाना है। मौजूदा जगहों में चेन्नई (तमिलनाडु), नैनीताल (उत्तराखंड), गुवाहाटी (असम) और कोलकाता (पश्चिम बंगाल) शामिल हैं
  7. अक्टूबर 2018 तक ग्रामीण स्वच्छता का दायरा बढ़कर 95 प्रतिशत तक हो चुका है जो स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत के समय 2014 में 39 प्रतिशत था। ग्रामीण भारत में 8.7 करोड़ निजी घरेलू शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है जिस वजह से 5.15 लाख गांवों, 530 जिलों और 25 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है।

 

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