कार्यस्थल पर यौन उत्तपीड़न की शिकायतों की जांच के लिए सरकार ने 25 अक्टूबर 2018 को सख्त कदम उठाया है। यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे लोग अब मंत्रियों के समूह की जांच से होकर गुजरेंगे। इसके सरकार ने जीओएम (मंत्रियों का समूह) का गठन किया हैजीओएम का अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को नियुक्त किया गया है। जीओएम में नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमन और मेनका गांधी को सदस्य बनाया गया है। यह समूह कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए बने कानून की समीक्षा यौन उत्पीड़न के मामलों की समीक्षा कर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा।
 
क्या है 
  1. मीटू अभियान के तहत विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर पर यौन उत्तपीड़न के आरोप लगने के बाद इस अभियान का रुख ही बदल गया। हर तरफ से दबाव बढ़ता देश सरकार को इसमें दखन देना पड़ा। 
  2. केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन शोषण से निपटने संबंधी कानूनी और संस्थागत ढांचा मजबूत बनाने के लिए 'मंत्री समूह्' गठन करने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है। 
  3. कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामलों को लेकर चलाये रहे मी टू अभियान को देखते हुए मेनका गांधी ने एक समिति गठित करने का प्रस्ताव किया था। उनके सुझाव पर सरकार ने आज एक मंत्री समूह गठित करने की घोषणा की। 
  4. मंत्री समूह महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित मौजूदा प्रावधानों की समीक्षा करके इन्हें अधिक मजबूत तथा प्रभावशाली बनाने के लिए तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देगा। 
विशाखा कानून का प्रावधान
  1. महिला पर अश्लील इशारे या उसे अश्लील साहित्य दिखाने पर पीड़िता शिकायत दर्ज करा सकती है।
  2. इस प्रवाधान के तहत यौन उत्पीड़न की शिकायत मिलने पर संस्थान को आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है।
  3. यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली महिला की अर्जी पर तुरंत सुनवाई होनी चाहिए।
  4. महिला के साथ यौन उत्पीड़न की घटना की जांच के लिए सभी संस्थानों में कमेटी गठित होगी। जिसकी अध्यक्ष सिर्फ महिला ही होगी। कमेटी में आधी सदस्य महिलाएं होंगी।
  5. महिला कर्मचारी के कपड़ों या शारीरिक बनावट पर टिप्पणी करने वाले के खिलाफ पीड़ित महिला शिकायत दर्ज करा सकती है।

 

Print Friendly, PDF & Email