जानलेवा स्तन कैंसर से पीड़ित मरीजों की उम्र करीब दस महीने तक बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए उन्हें कीमोथेरेपी के साथ इम्यूनोथेरेपी (इस उपचार में कैंसर से लड़ने के लिए प्रतिरोधी तंत्र को कृत्रिम रूप से उत्तेजित किया जाता है) की भी मदद लेनी होगी। इस थेरेपी से ट्रिपल निगेटिव कैंसर के मरीजों में मौत का खतरा करीब 40 फीसद तक कम हो जाता हैलंदन स्थित सेंट बार्थोलोमेव अस्पताल के शोधकर्ताओं ने इम्यूनोथेरेपी का परीक्षण करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। आमतौर पर 40 से 50 साल की महिलाएं ट्रिपल निगेटिव कैंसर से ग्रसित होती हैं। इसके इलाज के लिए कीमोथेरेपी इस्तेमाल की जाती है। कई मरीज हालांकि इस उपचार के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। फलस्वरूप, उन पर इलाज का कोई असर नहीं होता। यह बीमारी यदि शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाए तो मरीज 12 से 15 महीने ही जी सकता है
क्या है 
  1. इस बीमारी का इलाज ढूंढ़ने के लिए वैज्ञानिकों ने करीब 451 रोगियों पर शोध किया। इन सभी को कीमोथेरेपी के दौरान दो हफ्ते में एक बार इम्यूनोथेरेपी की दवा एटीजोलिजुमाब भी दी गई। 
  2. यह दवा शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है जिससे वह कैंसर की कोशिकाओं का सामना कर पाती है। दोनों उपचार साथ चलाने से मरीजों पर सकारात्मक प्रभाव हुआ। औसतन सभी मरीज दस महीने अधिक जी पाए।
  3. इम्यूनोथेरेपी एक तरह का उपचार है जो शरीर के प्रतिरोधी तंत्र (इम्यून सिस्टम) को प्रेरित करता है, उसे बढ़ाता या मजबूत बनाता है। इम्यूनोथेरेपी का प्रयोग कुछ विशेष प्रकार के कैंसर और इन्फ्लेमेटरी रोगों जैसे रियूमेटायड अर्थराइटिस, क्रोंस डिजीज और मल्टीपल स्क्‍लेरोसिस रोगों का इलाज करने के लिये किया जाता है। इसे बॉयोलॉजिकल थेरेपी, बॉयोथेरेपी या बॉयोलॉजिकल रिस्पांस मॉडिफायर (बीआरएम) थेरेपी भी कहा जाता है
कैसे करती है असर
  1. सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैंसर सेस की बाहरी सतह पर एक विशिष्ट प्रोटीन होता है जिसे एंटीजन कहते हैं। यह ऐसा प्रोटीन है जो इम्यून सिस्टम द्वारा निर्मित किए जाते हैं। 
  2. वे कैंसर कोशिकाओं के एंटीजन से जुड़ जाते हैं और उन्हें असामान्य कोशिकाओं के रूप में चिन्हित करते हैं। इम्यूनोथेरेपी में प्रयोग किये जाने वाले केमिकल जिनको प्राय: बॉयोलॉजिकल रिस्पांस मॉडीफायर कहा जाता है क्योंकि वे शरीर के सामान्य प्रतिरोधी तंत्र (इम्यून सिस्टम) को कैंसर के खतरे से निपटने लायक बनाते हैं।

 

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