अब कैंसर और हृदय व फेफड़े के गंभीर असंक्रामक रोगों का इलाज जिला अस्पताल में भी हो सकेगा। सरकार देशभर के सरकारी अस्पतालों में निजी भागीदारी से नई सुविधाओं का नेटवर्क खड़ा करने की तैयारी में है। इससे लोगों को कई गंभीर बीमारियों का सस्ता इलाज मुहैया हो पाएगा। नीति आयोग ने इस मुद्दे पर 17 अक्टूबर 2018 को दिशा-निर्देश जारी किए। इसके मुताबिक, सरकारी और निजी भागीदारी मॉडल के जरिये 700 जिला अस्पतालों में निजी अस्पतालों का सेंटर तैयार किया जाएगा। इन्हीं सेंटर में कैंसर और हृदय व फेफड़े की गंभीर बीमारियों से संबंधित आपात देखभाल, जांच और इलाज की सुविधा शुरू की जाएगी। 
 
क्या है 
  1. नए दिशा-निर्देश के मुद्दों पर दो साल की गंभीर चर्चा के बाद यह रूपरेखा बनाई गई गई है। इन दिशा-निर्देशों से निजी क्षेत्र का सहयोग आसान होगा और देश में गंभीर बीमारियों के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा खड़ा करने में मदद मिलेगी। 
  2. नीति आयोग के सदस्य वी.के. पॉल ने बताया कि देश में गंभीर और असंक्रामक बीमारियों का तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। लंबे समय से इन बीमारियों के लिए विशेष खर्च नहीं किया गया, लेकिन इस नई नीति से सस्ता इलाज संभव है। 
  3. नीति आयोग के स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी और निजी भागीदारी के मॉडल के तहत जारी नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जिला अस्पताल में ही निजी अस्पतालों के समान सेंटर तैयार किया जाएगा। इनमें वे तमाम सुविधाएं होंगी जो किसी निजी अस्पताल में होती हैं। 
  4. असंक्रामक बीमारियों के इलाज के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने से लेकर जरूरी सभी जांच मशीनें भी कंपनी को ही लगानी होंगी। गरीबों का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत होता रहेगा। साथ ही बाकी लोगों, यानी जो आयुष्मान भारत के लाभार्थी नहीं हैं उनके लिए भी इलाज महंगा न हो इसके लिए आयोग ने दरें  प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना वाली ही रखी हैं। 

 

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